इलाज पर होने वाले खर्च को कम करने और लोगों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ चला रही है। योजना के तहत पंजाब के प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है।
योजना का लाभ लेने के लिए पंजाब का निवासी सेवा केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर या सरकारी अस्पताल में आधार कार्ड और वोटर कार्ड के माध्यम से पंजीकरण करवा सकता है। पंजीकरण के बाद लाभार्थी का हेल्थ कार्ड बनाया जाता है।
राज्य भर में करीब 900 सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। इससे लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी इलाज का विकल्प मिलता है।
पंजाब स्टेट हेल्थ एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक 3.79 लाख मरीजों को 654 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया है।
योजना के तहत अब तक 47.27 लाख हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं और पूरे पंजाब में 23.01 लाख परिवार योजना से जुड़ चुके हैं।
जारी किए गए हेल्थ कार्ड के लाभार्थियों में 48.5 प्रतिशत पुरुष और 51.5 प्रतिशत महिलाएं हैं। क्षेत्र के आधार पर देखें तो लगभग 69 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जबकि 31 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों से संबंधित हैं। इससे पता चलता है कि योजना के तहत पंजीकरण का बड़ा हिस्सा पंजाब के ग्रामीण इलाकों में हुआ है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कई गंभीर बीमारियों और चिकित्सा प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इनमें हार्ट केयर, डायलिसिस, ऑर्थोपेडिक्स, कैंसर का इलाज और इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाएं शामिल हैं।
गंभीर बीमारी या सर्जरी की स्थिति में इलाज का खर्च किसी भी परिवार के बजट पर बड़ा आर्थिक दबाव डाल सकता है। ऐसे में सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा का उद्देश्य पात्र परिवारों के सीधे स्वास्थ्य खर्च को कम करना है।
पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह राशि योजना के तहत बढ़ते पंजीकरण और कैशलेस इलाज के खर्च को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए प्रमुख बजटीय प्रावधानों में शामिल है।
अब तक 3.79 लाख मरीजों को उपलब्ध कराए गए इलाज की कुल लागत 654 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, 23.01 लाख परिवार योजना में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में लाभार्थियों और इलाज के मामलों की संख्या बढ़ने के साथ योजना के वित्तीय प्रबंधन और अस्पताल नेटवर्क की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
सेहत योजना का दायरा बढ़ाने और अधिक लोगों का पंजीकरण करने के लिए पंजाब सरकार ने आशा वर्करों के नेटवर्क को भी अभियान से जोड़ा है। राज्य भर में 19 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ता और लगभग 900 सुविधाकर्ता राज्य के गांवों में पंजीकरण अभियान चला रहे हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्हें योजना की जानकारी नहीं है या जिन्हें पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने में सहायता की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा वर्करों की स्थानीय स्तर पर मौजूदगी के कारण पात्र परिवारों तक पहुंचने और उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
पंजीकरण की गति बनाए रखने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था भी लागू की है। सफल पंजीकरण के लिए संबंधित कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
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