चंडीगढ़, 2 जून 2026: पंजाब कैबिनेट ने आने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य की चुनाव मशीनरी को मज़बूत करने के लिए चुनाव विभाग के सेवा नियमों में संशोधनों को मंजूरी दी है।
इस फ़ैसले से लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक रुकावटें दूर होंगी। SIR का काम बिना किसी रुकावट के और आसानी से पूरा हो सकेगा। चुनाव से जुड़े कामों के लिए पर्याप्त स्टाफ़ सुनिश्चित करने हेतु खाली पड़े ज़रूरी पदों को भरने का रास्ता साफ़ होगा। कैबिनेट ने जल संसाधन विभाग की वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट को भी मंज़ूरी दी।
ये फ़ैसले आज यहाँ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान लिए गए। इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि कैबिनेट ने चुनाव विभाग के सेवा नियमों में एक संशोधन को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत ‘चुनाव वकील’ के पद से ‘चुनाव तहसीलदार’ के पद पर पदोन्नति के लिए ज़रूरी अनुभव को 15 साल से घटाकर 12 साल कर दिया गया है।
विभाग में ‘चुनाव तहसीलदार’ के 7 पद खाली होने के कारण यह संशोधन ज़रूरी हो गया था। मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष संशोधन और आने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए, चुनाव से जुड़े कामों को सुचारू रूप से चलाने के लिए ‘चुनाव तहसीलदारों’ की सेवाओं की तत्काल ज़रूरत है।
मौजूदा नियमों के तहत, 15 साल के अनुभव की ज़रूरत होती है, और अभी सेवा दे रहे ‘चुनाव वकीलों’ में से कोई भी पदोन्नति के लिए योग्य नहीं है। विभाग ने ज़रूरी अनुभव को घटाकर 12 साल करने का प्रस्ताव दिया था, ताकि भविष्य में योग्य ‘चुनाव वकीलों’ को पदोन्नति दी जा सके और चुनाव मशीनरी को मज़बूत करने के लिए खाली पदों को भरा जा सके।
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