युद्ध नशों के विरुद्ध मुहिम के तहत पंजाब में 90,000 से अधिक नशा पीड़ितों को नशामुक्ति

by Manu
डॉ. बलबीर सिंह

चंडीगढ़, 15 जून 2026: भगवंत मान सरकार का युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान सकारात्मक नतीजे दिखाने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान की स्थायी सफलता न केवल नशीले पदार्थों के तस्करों और सप्लायरों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई पर निर्भर करेगी, बल्कि रोकथाम, समय पर पहचान, इलाज और परिवारों व समाज से समय पर मिलने वाले सहयोग पर भी निर्भर करेगी।

1 मार्च, 2025 को शुरू किया गया ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नशा-विरोधी पहलों में से एक बन गया है। इसके तहत सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशा छुड़ाने, पुनर्वास और जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “रोकथाम और पुनर्वास प्रयासों के तहत, 1 मार्च, 2025 से मई 2026 तक पंजाब भर में नशा मुक्ति केंद्रों और ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OAT) केंद्रों में 90,000 से अधिक नशा-प्रभावित लोगों को भर्ती किया गया और उनका इलाज किया गया।” उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सख्त कार्रवाई के साथ-साथ इलाज और रिकवरी पर पंजाब सरकार के विशेष फोकस को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य भर में नशे के खिलाफ़ अभियान जारी है। लेकिन ऐसे संवेदनशील लोगों की पहचान करने में शिक्षकों, माता-पिता और समुदाय के सदस्यों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, जिन्हें नशे की लत लगने का खतरा है। उन्होंने कहा, “नशे की लत के शुरुआती संकेत अक्सर ध्यान में नहीं आते हैं और वे भावनात्मक, व्यवहार संबंधी और शारीरिक बदलावों के रूप में सामने आते हैं।”

शुरुआती संकेतों में अचानक मूड बदलना, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई या काम में ध्यान न देना, परिवार से दूरी बनाना, अपनी गतिविधियों के बारे में बातें छिपाना, बार-बार पैसे मांगना, नए दोस्त बनाना, नींद में गड़बड़ी और खेल या अन्य गतिविधियों में रुचि कम होना शामिल हो सकता है।

शारीरिक लक्षणों में व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान न देना, थकान, लाल आँखें, बहुत ज़्यादा नींद आना, खान-पान की आदतों में बदलाव और बिना किसी स्पष्ट कारण के वज़न में उतार-चढ़ाव शामिल हो सकते हैं। अभियान से जुड़े विशेषज्ञों ने परिवारों को सलाह दी है कि वे ऐसे व्यवहार संबंधी बदलावों को नज़रअंदाज़ न करें। माता-पिता को अपने बच्चों से बिना डांटे या दोष दिए शांत और सहयोगी तरीके से बात करनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से मदद लेनी चाहिए।

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