चिट्टा के खिलाफ चॉक, पंजाब की क्लासरूम ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का अग्रिम मोर्चा बनीं

by Manu
युद्ध नशेआं विरुद्ध

चंडीगढ़, 03 जुलाई 2026: पंजाब में हज़ारों शिक्षक राज्य को नशा-मुक्त बनाने के अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह लड़ाई पुलिस स्टेशनों और नशा-मुक्ति केंद्रों से आगे बढ़कर स्कूलों और क्लासरूम तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ (War on Drugs) अभियान के तहत, ट्रेंड शिक्षकों, जागरूक प्रिंसिपलों और सुरक्षित स्कूल माहौल के ज़रिए हर बच्चे के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया जा रहा है।

बच्चों को नशे के नुकसान के बारे में बताने के साथ-साथ, उन्हें तनाव को संभालने के तरीके और गोपनीय रूप से शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है।

इस सिस्टम को और मज़बूत करने के लिए, पंजाब सरकार उन लोगों पर निवेश कर रही है जो रोज़ाना किशोरों के संपर्क में आते हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज के विशेषज्ञों की मदद से, नौ ज़िलों (खासकर सीमावर्ती ज़िलों) के 1,400 से ज़्यादा स्कूल प्रमुखों को नशे की लत के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, सहानुभूतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया देने और पब्लिक हेल्थ के नज़रिए से मानसिक स्वास्थ्य को संभालने के लिए ट्रेनिंग दी गई है।

इसके अलावा, अमृतसर में 9वीं से 12वीं कक्षा के 3,000 से ज़्यादा शिक्षकों के लिए क्षमता-निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित की गईं। इस ट्रेनिंग के अच्छे नतीजे सामने आए हैं। ट्रेनिंग के बाद, 75 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे स्कूलों में एक स्वस्थ माहौल बनाने के लिए प्रेरित हुए हैं, जबकि 85 प्रतिशत ने माना कि किशोरों में नशे की लत की समस्या तनाव, साथियों के दबाव और भावनात्मक चुनौतियों से जुड़ी है। अब इस प्रोग्राम को राज्य के सभी ज़िलों में बढ़ाया जा रहा है।

स्कूल स्टाफ के बीच जागरूकता के साथ-साथ, सरकार किशोरों में तनाव और भावनात्मक समस्याओं के मुख्य कारणों पर भी ध्यान दे रही है। राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 6वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए शुरू किए गए ‘माइंडफुलनेस प्रोग्राम’ के तहत हर सुबह 30 मिनट का सेशन होता है। इसमें छात्रों का ध्यान (concentration), भावनात्मक मज़बूती और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए सांस लेने की कसरत, ध्यान (meditation), सकारात्मक सोच और आभार व्यक्त करने वाली गतिविधियाँ शामिल हैं।

मोहाली के लगभग 210 सरकारी स्कूलों में चलाए गए इस पायलट प्रोग्राम में, 83 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे अब मुश्किल हालात का सामना पहले से बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं और कम तनाव महसूस करते हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “नशे से बचाया गया हर बच्चा एक सुरक्षित परिवार और मजबूत भविष्य की नींव है। स्कूलों को ऐसी जगह बनाकर जहाँ बच्चे आत्मविश्वास, मुश्किलों का सामना करने की क्षमता और जीवन से जुड़े कौशल विकसित कर सकें, सरकार एक स्वस्थ समाज की नींव रख रही है। हमारा मकसद सिर्फ नशे के खतरों के बारे में चेतावनी देना नहीं है, बल्कि बच्चों को सही फैसले लेने के लिए जरूरी जानकारी, क्षमता और समझ देना भी है।”

पंजाब ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए भारत का पहला सबूतों पर आधारित राज्य-स्तरीय नशा-विरोधी पाठ्यक्रम शुरू करके अपनी रोकथाम की रणनीति को और मजबूत किया है। पिछले साल अगस्त में शुरू हुए इस प्रोग्राम में 3,658 स्कूलों के लगभग 8 लाख छात्र शामिल हैं और इसे 6,500 से ज़्यादा ट्रेंड टीचर पढ़ा रहे हैं।

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