चंडीगढ़, 08 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित प्रक्रिया को नजरअंदाज करने की एक और घटना की पुरजोर निंदा की। पंजाब सरकार की राय की प्रतीक्षा किए बिना जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित किया कि जब तक पंजाब की राय नहीं ले ली जाती और उन पर योग्य विचार नहीं कर लिया जाता, तब तक नियुक्ति और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को रोका जाए।
एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब कैबिनेट ने केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के अधिकारों पर लगातार किए जा रहे हमलों और संवैधानिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति करना निर्धारित प्रक्रिया (मेमोरंडम ऑफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधा उल्लंघन है। केंद्र की ओर से हमारे 9,000 करोड़ रुपए के आर.डी.एफ. और बाढ़ राहत पैकेज को रोकना, बी.बी.एम.बी. के नियम बदलना और अब न्यायिक नियुक्तियों में सीधा दखल देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार राज्य की राय को उचित सम्मान दिया जाए। इंकलाब जिंदाबाद।”
इस बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ऑफिस ने कहा, “केंद्र सरकार लंबे समय से पंजाब के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। हाल के दिनों में केंद्र का दखल बहुत बढ़ गया है, जिसमें पंजाब को भारत के संविधान और कई नियमों/कानूनों के तहत मिले अधिकारों से बार-बार वंचित किया गया है।”
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, “केंद्र ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) के नियमों में सर्वसम्मति से बदलाव करके उस पारंपरिक परंपरा को खत्म कर दिया, जिसके तहत सदस्य (पावर) का चयन पंजाब से होना सुनिश्चित था। इससे राज्य के अपने नदीय जल और बांधों पर इसकी प्रतिनिधित्व को कमजोर किया गया है। इसके अलावा केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीकरण का प्रस्ताव रखा था, जिसका पंजाब द्वारा पुरजोर विरोध किया गया था, लेकिन केंद्र ने अपनी अथॉरिटी का दुरुपयोग करके पंजाब के लोगों की पकड़ और अधिकारों को दबाने के लिए अपना दखल जारी रखा है।”
पंजाब कैबिनेट ने चेतावनी दी, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार के 9,000 करोड़ रुपए से अधिक के आर.डी.एफ. के बकाए भी रोक लिए हैं, जिससे किसानों को तकलीफ पहुंची है, जो इन फंडों के जरिए बनाए जाने वाले ढांचे के असल लाभार्थी हैं। इसी तरह केंद्र ने 2025 में आए विनाशकारी बाढ़ों के बाद प्रधानमंत्री के जरिए 1,600 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया था, लेकिन आज तक इस पैकेज में से एक रुपया भी पंजाब को जारी नहीं किया गया।”
दिनांक 5 सितंबर 2026 के ताजा नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए पंजाब कैबिनेट ने कहा, “कानून और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के जरिए भारत के राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आदेश पारित किया है। यह नियुक्ति राज्य सरकार की सहमति लिए बिना की गई है, जिससे सभी संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया है।”
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