बंगाली खाने का स्वाद शिल नोरा पर मसाले पीसने से क्यों बदल जाता है? जानें इसकी खास वजह

by Priya

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2026: आज के आधुनिक किचन में मिक्सर-ग्राइंडर ने मसाले पीसने और पेस्ट तैयार करने का काम काफी आसान कर दिया है। कुछ ही मिनटों में सरसों, खसखस और दाल को पीसा जा सकता है। लेकिन बंगाल के कई घरों में आज भी पारंपरिक पत्थर का उपकरण ‘शिल नोरा’ इस्तेमाल किया जाता है। बंगाली व्यंजनों में इसका इस्तेमाल केवल परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि खाने की बनावट और स्वाद से भी जुड़ा है।

कुकरी कॉलमिस्ट और लेखिका रुक्मा दाक्षी के मुताबिक, शिल नोरा पर पीसे गए मसालों और मिक्सर में तैयार पेस्ट के स्वाद और टेक्सचर में अंतर महसूस किया जा सकता है। इसकी वजह दोनों उपकरणों के काम करने का तरीका है।

क्या है शिल नोरा?

शिल नोरा एक पारंपरिक पत्थर का ग्राइंडिंग उपकरण है। इसमें एक सपाट पत्थर और एक हाथ से चलाया जाने वाला बेलनाकार पत्थर होता है। सामग्री को सपाट सतह पर रखकर दूसरे पत्थर से दबाव और घर्षण के जरिए पीसा जाता है।

इसके विपरीत, मिक्सर-ग्राइंडर में तेज गति से घूमने वाले ब्लेड सामग्री को छोटे टुकड़ों में काटते और तोड़ते हैं। शिल नोरा पर धीरे-धीरे पीसने से सामग्री की बनावट पर ज्यादा नियंत्रण मिलता है। साथ ही, पीसने के दौरान निकलने वाले प्राकृतिक तेल और सुगंधित तत्व पेस्ट के स्वाद को प्रभावित करते हैं।

आलू पोस्तो और सरसों के पेस्ट में दिखता है अंतर

बंगाली व्यंजन आलू पोस्तो में खसखस यानी पोस्तो का पेस्ट खास भूमिका निभाता है। शिल नोरा पर इसे पीसने से गाढ़ा और क्रीमी पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इससे पेस्ट आलू पर अच्छी तरह चिपकता है और डिश को खास टेक्सचर मिलता है।

मिक्सर में कम मात्रा में खसखस पीसते समय कई बार सामग्री ब्लेड के आसपास ठीक से नहीं घूमती। ऐसे में पेस्ट दानेदार रह सकता है या उसे पीसने के लिए ज्यादा पानी डालना पड़ सकता है।

सरसों के पेस्ट में भी पीसने का तरीका अहम है। सरसों को पानी के साथ कुचलने पर मायरोसिनेज नामक एंजाइम की मदद से तीखापन पैदा करने वाले यौगिक निकलते हैं। शिल नोरा पर धीरे-धीरे पीसने से पेस्ट की बनावट और प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है।

भर्ता और दाल बोरा का टेक्सचर भी होता है अलग

बैंगन का भर्ता, टमाटर भर्ता और आलू भर्ता जैसे व्यंजनों में शिल नोरा सामग्री को पूरी तरह चिकना पेस्ट बनाने के बजाय थोड़ा दरदरा रखने में मदद करता है। इससे प्याज, हरी मिर्च और भुनी सब्जियों का स्वाद और बनावट अलग-अलग महसूस होती है।

दाल बोरा तैयार करते समय भी भीगी हुई दाल को धीरे-धीरे पीसने से उसमें हल्की दरदराहट बनी रह सकती है। इससे पकने के बाद बोरा बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम बन सकता है।

क्या मिक्सर-ग्राइंडर से अच्छा पेस्ट नहीं बन सकता?

ऐसा नहीं है कि मिक्सर-ग्राइंडर से अच्छे बंगाली व्यंजन नहीं बनाए जा सकते। सही मात्रा में सामग्री डालकर, कम पानी का इस्तेमाल करके और लगातार चलाने के बजाय छोटे-छोटे पल्स में पीसकर अच्छा परिणाम पाया जा सकता है।

शिल नोरा का फायदा यह है कि इसमें सामग्री को हाथ से महसूस करते हुए उसकी बनावट के अनुसार पीसने की प्रक्रिया रोकी जा सकती है। इसलिए पारंपरिक उपकरण आज भी उन रसोइयों के लिए खास हैं जो स्वाद के साथ-साथ खाने के टेक्सचर को भी महत्व देते हैं।

कुल मिलाकर, शिल नोरा केवल पुराना रसोई उपकरण नहीं है। यह बंगाली खानपान की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें मसालों को पीसने का तरीका भी व्यंजन के अंतिम स्वाद और बनावट को प्रभावित करता है।

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