नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि रात में 8 घंटे सोने के बावजूद सुबह उठने पर थकान महसूस होती है? कई बार इसकी वजह सिर्फ नींद के घंटों की कमी नहीं, बल्कि तनाव और नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है। मानसिक दबाव हमारी नींद, ऊर्जा और दिनभर के मूड को प्रभावित कर सकता है।
इंडियन एक्सप्रेस की 22 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में मनोचिकित्सक ने बताया कि तनाव के दौरान नींद का अनुभव बदल सकता है। व्यक्ति लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के बावजूद सुबह तरोताजा महसूस नहीं करता। चिंता और लगातार चलने वाले विचारों के कारण सोने में परेशानी या रात में बार-बार जागने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
तनाव और नींद का क्या है संबंध?
तनाव के दौरान शरीर सतर्क रहने की स्थिति में बना रह सकता है। ऐसे में मन को शांत करना और गहरी नींद लेना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद दिन में सुस्ती, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और कम ऊर्जा महसूस हो सकती है।
हालांकि, हर बार थकान की वजह तनाव ही नहीं होता। अनियमित दिनचर्या, कुछ दवाएं, खर्राटों के साथ सांस रुकने की समस्या और अन्य स्वास्थ्य कारण भी नींद के बाद थकान का कारण बन सकते हैं।
बेहतर नींद के लिए क्या करें?
- सोने और उठने का समय तय रखें: रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं।
- सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें: बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल और दूसरे उपकरणों से दूरी बनाने की कोशिश करें।
- मन को शांत करने की आदत अपनाएं: हल्की स्ट्रेचिंग, धीमी सांस लेने का अभ्यास या शांत गतिविधि मददगार हो सकती है।
- कैफीन पर ध्यान दें: शाम के समय चाय, कॉफी और अन्य कैफीन वाले पेय कम करें, खासकर यदि इनसे आपकी नींद प्रभावित होती है।
यदि पर्याप्त नींद लेने के बाद भी लगातार थकान बनी रहती है, दिन में अत्यधिक नींद आती है या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। नींद के घंटों के साथ उसकी गुणवत्ता और थकान के दूसरे संभावित कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।