दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026: 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तरफ से की गई कार्रवाई और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज रविवार को विशेष सुनवाई की।
इस दौरान कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो शहर से सभी बैरिकेड्स हटाए जाने चाहिए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नियमों के दायरे में आम नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही को सामान्य किया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय की आज की यह टिप्पणी वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर आई है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के उस आदेश का हवाला दिया गया था जो प्रदर्शन के दौरान 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ दायर एक अन्य मामले में दिया गया था।
मामले में जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन यह प्रक्रिया पुलिस एक्ट के दायरे में ही होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन जिस तरह से आप प्रदर्शन करते हैं वह पुलिस अधिनियम के नियमों के भीतर होना चाहिए।
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