मुख्यमंत्री सेहत योजना: पंजाब की महिलाओं को सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

by Ankush
मुख्यमंत्री सेहत योजना

चंडीगढ़, 22 जून 2026 पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित और समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत किए गए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) के 57 प्रतिशत मामले गर्भावस्था के पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए हैं।

अब तक योजना के अंतर्गत 323 कैशलेस एमटीपी प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत 14.86 लाख रुपये रही। इनमें से 185 मामले गर्भावस्था के शुरुआती आठ सप्ताह के दौरान किए गए। ये सेवाएं राज्यभर के 800 से अधिक सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

शुरुआती गर्भावस्था में सबसे अधिक लाभ उठा रहीं महिलाएं

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्भसमापन का निर्णय कई व्यक्तिगत, चिकित्सकीय और सामाजिक-आर्थिक कारणों से प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए एमटीपी मामलों की संख्या कुल मामलों के आधे से अधिक रही, जिससे यह योजना के अंतर्गत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली श्रेणी बन गई है।

आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अधिकांश महिलाएं गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही सुरक्षित और चिकित्सकीय निगरानी में गर्भसमापन सेवाओं का लाभ ले रही हैं। इस अवधि में प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम जटिल होती है और स्वास्थ्य जोखिम भी कम रहते हैं।

निजी अस्पतालों में भी कैशलेस सुविधा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत गर्भसमापन (एमटीपी) सेवाओं की कैशलेस सुविधा का दायरा बढ़ा दिया है। अब महिलाएं सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी बिना किसी खर्च के यह सुविधा प्राप्त कर सकती हैं।

सरकार का उद्देश्य महिलाओं पर स्वास्थ्य सेवाओं का आर्थिक बोझ कम करना और समय पर गुणवत्तापूर्ण प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने क्या कहा

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार का उद्देश्य महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाना और उपचार में होने वाली देरी को कम करना है।

उन्होंने कहा, “सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस सेवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य समय पर उपचार सुनिश्चित करना तथा देरी से हस्तक्षेप के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को कम करना है।”

समय पर इलाज से कम होता है स्वास्थ्य जोखिम

माता कौशल्या अस्पताल की वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रमिता अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित गर्भकाल सीमा के भीतर चिकित्सकीय निगरानी में किया गया गर्भसमापन सुरक्षित और प्रभावी होता है।

उन्होंने बताया कि उपचार में देरी अक्सर आर्थिक कठिनाइयों, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाओं के कारण होती है। ऐसी स्थिति में कई महिलाएं असुरक्षित तरीकों या स्वयं दवा लेने का सहारा लेती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि किसी भी दवा या प्रक्रिया से पहले प्रत्येक मामले का उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

गर्भसमापन के प्रमुख कारण

डॉ. रमिता अग्रवाल के अनुसार, गर्भसमापन के प्रमुख कारणों में शामिल हैं—

  • गर्भनिरोधक साधनों का असफल होना।
  • अनियोजित या अनचाहा गर्भधारण।
  • आर्थिक कारण और बच्चे के पालन-पोषण का खर्च।
  • गर्भावस्था से मां के स्वास्थ्य को खतरा।
  • भ्रूण में गंभीर जन्मजात या चिकित्सकीय असामान्यताएं।
  • पढ़ाई, नौकरी या अन्य व्यक्तिगत एवं करियर संबंधी कारण।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का विस्तार यह दर्शाता है कि कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं प्रजनन स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आर्थिक बाधाओं को कम करके और संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर यह योजना महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

ये भी देखें: पंजाब की महिलाओं के लिए यह दुनिया का सबसे बड़ा सशक्तिकरण कार्यक्रम

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