चंडीगढ़, 2 जून 2026: पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और चोटों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के आंकड़ों के अनुसार, ऑर्थोपेडिक इलाज राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है।
राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के तहत अब तक हड्डियों, जोड़ों और चोटों से जुड़े इलाज पर 84 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए जा चुके हैं। यह सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल ज़रूरतों में हो रही बढ़ोतरी और विशेष ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के तहत सबसे ज़्यादा घुटने बदलने (नी रिप्लेसमेंट) के इलाज किए गए हैं। इसके बाद कूल्हे की सर्जरी और प्लेट, कील (नेल) व अन्य इम्प्लांट के ज़रिए फ्रैक्चर ठीक करने के इलाज किए गए हैं। ये इलाज अब ज़िला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस सुविधा के तहत नियमित रूप से किए जा रहे हैं।
पंजाब में अब तक 45 लाख से ज़्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक इस्तेमाल का संकेत है। इस योजना के तहत, लुधियाना में 4.8 लाख से ज़्यादा और पटियाला में करीब 4.1 लाख लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।
ऑर्थोपेडिक मामलों में बढ़ोतरी सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों को भी दर्शाती है। जोड़ों की समस्याएं, लगातार दर्द और चलने-फिरने में दिक्कतें बढ़ रही हैं, खासकर बुज़ुर्ग आबादी में। सरकारी अस्पतालों में घुटने और कूल्हे की समस्याओं, जोड़ों में लंबे समय से दर्द और चलने में दिक्कत वाले मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है।
ऑर्थोपेडिक इलाज में अक्सर महंगे इम्प्लांट, लंबे समय तक इलाज और रीहैबिलिटेशन (स्वास्थ्य लाभ) की ज़रूरत पड़ती है, जिससे परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
राजपुरा के पास खेड़ा गाजू के रहने वाले 43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति व्यक्तिगत तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण रही है।
तनेजा का एक फैक्ट्री में काम करते समय हादसा हो गया था। इसके बाद उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी। चलते समय अचानक होने वाले दर्द के कारण उन्हें रुकना पड़ता और दीवार का सहारा लेना पड़ता था। घुटने के आसपास सूजन लगातार बनी रहती थी और अकड़न के कारण उन्हें रोज़मर्रा के सबसे बुनियादी काम करने में भी मुश्किल होती थी। कभी-कभी तो वह खड़े होने से पहले ही रुक जाते थे, यह सोचते हुए कि क्या उनका पैर उनके शरीर का वज़न उठा पाएगा या नहीं।
उन्हें 6 मई को पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल में भर्ती कराया गया और अगले ही दिन उनके लिगामेंट फटने का इलाज किया गया। डॉक्टरों ने उनमें जोड़ों में तेज़ दर्द, सूजन, अस्थिरता और शरीर का वज़न उठाने में दिक्कत जैसे लक्षण पाए। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत उन्हें 86,750 रुपये का पूरी तरह से कैशलेस इलाज मिला। उन्हें 12 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया और वे मेडिकल बिल की चिंता किए बिना घर लौट आए।
गुलशन तनेजा ने कहा, “अब मैं धीरे-धीरे ठीक हो रहा हूँ। हेल्थ कार्ड की वजह से मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। यह योजना हमारे जैसे परिवारों का खर्च कम कर रही है और महंगे इलाज को आसान बना रही है।”
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