यूपी में कंपनियों के मर्जर और बंटवारे पर 0.50% स्टांप शुल्क के प्रस्ताव को मंजूरी

by Priya
मिशन कर्मयोगी

लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कंपनियों के विलय (मर्जर) और बंटवारे (डीमर्जर) के लिए स्टांप शुल्क की व्यवस्था स्पष्ट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत शेयरों के मूल्य पर 0.50 प्रतिशत स्टांप शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कानूनी संशोधन और केंद्र सरकार की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक कंपनियों के विलय या बंटवारे के दौरान स्टांप शुल्क को लेकर स्पष्ट नियम नहीं होने से कई मामलों में असमंजस की स्थिति बनती थी।

संपत्ति होने पर शुल्क का अलग प्रावधान

स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग के मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि कंपनियों के पास अचल संपत्ति होने की स्थिति में भी शुल्क से जुड़े नियम स्पष्ट किए जाएंगे। ऐसे मामलों में संपत्ति के सर्किल रेट का दो प्रतिशत या शेयरों के मूल्य पर निर्धारित 0.50 प्रतिशत शुल्क में से जो राशि अधिक होगी, उसके आधार पर शुल्क तय करने का प्रावधान प्रस्तावित है।

सरकार का कहना है कि इस कदम से कंपनियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया आसान होगी और पंजीकरण के दौरान होने वाले विवाद कम करने में मदद मिलेगी।

लागू होने से पहले पूरी करनी होगी कानूनी प्रक्रिया

इस फैसले के लिए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 में संशोधन करना होगा। प्रस्ताव को राज्य विधानमंडल की प्रक्रिया से गुजरने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसलिए नई दरों को तत्काल लागू हुई व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार को उम्मीद है कि स्पष्ट नियम बनने से कारोबार करने में आसानी होगी और कंपनियों को विलय या बंटवारे के दौरान स्टांप शुल्क से जुड़ी अनिश्चितता का सामना कम करना पड़ेगा।

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