जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान बनेगा बिहार पर्यटन की नई पहचान, बनेगा 26 किलोमीटर लंबा ग्रीन-रिवरफ्रंट कॉरिडोर

by Manu
जेपी गंगा पथ

पटना, 20 जून 2026: राजधानी पटना के गंगा तट पर विकसित की जा रही जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान परियोजना बिहार के शहरी विकास, पर्यटन संवर्धन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभर रही है। राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना गंगा के विस्तृत नदी तट को विश्वस्तरीय सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करते हुए पाटलिपुत्र की गौरवशाली विरासत को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगी।

बिहार को प्राप्त गंगा का विशाल एवं प्राकृतिक नदी तट इस पहल को विशिष्ट बनाता है। देश में विरले ही ऐसे शहर हैं जहाँ नदी, इतिहास, संस्कृति और शहरी विस्तार की इतनी व्यापक संभावनाएँ एक साथ उपलब्ध हों। इसी विशेषता को आधार बनाकर एक ऐसा हरित एवं सांस्कृतिक रिवरफ्रंट विकसित किया जा रहा है, जो प्रकृति, विरासत, पर्यटन और आधुनिक नागरिक सुविधाओं का संतुलित समागम प्रस्तुत करेगा। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल बिहार की विशिष्ट पहचान को सशक्त करने के साथ-साथ राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई ऊँचाई प्रदान करेगी।

प्रथम चरण में लगभग 6 किलोमीटर लंबे ग्रीन-पार्क कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। द्वितीय चरण में इसका विस्तार करते हुए इसे लगभग 26 किलोमीटर तक विकसित किया जाएगा, जिससे ऐतिहासिक पटना सिटी क्षेत्र भी इस महत्वाकांक्षी पहल से जुड़ सकेगा। इसके परिणामस्वरूप गंगा तट के साथ एक विस्तृत, सतत एवं एकीकृत हरित-पर्यटन गलियारे का निर्माण होगा। विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि इस कॉरिडोर का विकास केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित न रहकर पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं के एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाए।

परिकल्पना के अनुसार यह क्षेत्र केवल मनोरंजन स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल-आधारित पर्यटन, सांस्कृतिक आयोजनों, सार्वजनिक गतिविधियों, प्रकृति अवलोकन, स्थानीय उद्यमिता और विरासत आधारित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। वाटर मेट्रो जेट्टी, पर्यटन घाट, गंगा चैनल, पटना हाट, वेस्ट-टू-वंडर पार्क, स्वतंत्रता सेनानी पार्क, बॉटनिकल गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन और अन्य सार्वजनिक सुविधाएँ इसे एक बहुआयामी शहरी गंतव्य का स्वरूप प्रदान करेंगी।

गंगा पथ के किनारे विकसित की जाने वाली लगभग 50 दुकानों के लिए ‘गंगा एवं पाटलिपुत्र थीम’ पर आधारित एक विशिष्ट आइकॉन विकसित किया जाएगा। इसके चयन हेतु राज्यस्तरीय डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार क्रमशः ₹51,000, ₹21,000 एवं ₹11,000 प्रदान किए जाएंगे। विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि सम्पूर्ण क्षेत्र की पहचान गंगा एवं पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हो तथा विकसित होने वाली संरचनाओं, साइनेज, सार्वजनिक स्थलों और दुकानों में बिहार की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो।

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