नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026। घरों में रोज इस्तेमाल होने वाले दूध के पैकेट, चिप्स के रैपर, बिस्कुट के पैकेट और प्लास्टिक की बोतलों को अक्सर एक ही तरह का कचरा समझकर फेंक दिया जाता है। लेकिन इन सभी चीजों को रीसाइकिल करना एक जैसा आसान नहीं है। किसी पैकेट पर रीसाइक्लिंग का निशान बना होने का मतलब यह नहीं है कि वह वास्तव में रीसाइकिल भी हो जाएगा।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पर्यावरण क्षेत्र की विशेषज्ञ और EcoEx की सह-संस्थापक एवं CEO अक्षया राठ ने बताया कि पैकेजिंग की रीसाइक्लिंग उसकी सामग्री, कचरा इकट्ठा करने की व्यवस्था और उपलब्ध प्रोसेसिंग सुविधाओं पर निर्भर करती है।
किन पैकेजिंग की रीसाइक्लिंग आसान है?
भारत में PET प्लास्टिक की बोतलों, HDPE कंटेनरों और कुछ PP तथा LDPE पैकेजिंग के लिए रीसाइक्लिंग की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है। हालांकि, इसके लिए भी कचरे का सही तरीके से इकट्ठा होना और अलग-अलग छांटा जाना जरूरी है।
दूसरी ओर, चिप्स के पैकेट, बिस्कुट के रैपर और कई तरह के मल्टीलेयर पाउच को रीसाइकिल करना मुश्किल होता है। इनमें प्लास्टिक की कई परतें या मेटल जैसी परतें हो सकती हैं, जिन्हें अलग करना आसान नहीं होता।
क्या दूध के पैकेट रीसाइकिल हो सकते हैं?
उपयुक्त पॉलीथीन फिल्म से बने दूध के पैकेट सही तरीके से इकट्ठा और छांटे जाने पर मैकेनिकल रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इसी तरह PET और कुछ PP ट्रे भी उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर रीसाइकिल की जा सकती हैं।
लेकिन छोटे, गंदे या कई परतों से बने पैकेटों को प्रोसेस करना कठिन हो सकता है। इसलिए कचरे को साफ और अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण है।
क्या पेपर बैग और कांच हमेशा बेहतर विकल्प हैं?
विशेषज्ञ के मुताबिक, किसी पैकेजिंग को केवल उसके मटेरियल के आधार पर पर्यावरण के लिए बेहतर नहीं कहा जा सकता। हर विकल्प का अपना पर्यावरणीय प्रभाव होता है।
पेपर बैग बनाने में पानी और ऊर्जा खर्च होती है। कांच की बोतलें भारी होती हैं, जिससे उनके परिवहन में अधिक ऊर्जा लग सकती है। वहीं, कॉटन बैग बनाने में भी संसाधनों की जरूरत होती है।
किसी विकल्प का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कितनी बार इस्तेमाल किया जाता है, कैसे बनाया और पहुंचाया जाता है तथा इस्तेमाल के बाद उसका प्रबंधन कैसे होता है।
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञ ने उपभोक्ताओं के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
- खरीदारी के लिए बार-बार इस्तेमाल होने वाले बैग साथ रखें।
- जरूरत से ज्यादा पैकेजिंग वाले उत्पादों से बचने की कोशिश करें
- सूखे कचरे को गीले कचरे से अलग रखें।
- जिन कंटेनरों का दोबारा इस्तेमाल सुरक्षित है, उन्हें फेंकने के बजाय उपयोग में लाएं।
- रीसाइकिल होने वाली सामग्री को उचित कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाएं।
- Recyclable, biodegradable और compostable पैकेजिंग के बीच अंतर समझें।
रीसाइक्लिंग का निशान ही काफी नहीं
विशेषज्ञ के अनुसार, पैकेजिंग पर बना रीसाइक्लिंग का निशान केवल उसकी सामग्री की पहचान बताता है। यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि उस उत्पाद को वास्तव में रीसाइकिल किया जाएगा।
इसके लिए कचरा संग्रह, सही छंटाई, तकनीक और प्रमाणित रीसाइक्लिंग केंद्रों की उपलब्धता जरूरी है। ऐसे में प्लास्टिक कचरा कम करने की जिम्मेदारी केवल उपभोक्ताओं की नहीं, बल्कि कंपनियों और कचरा प्रबंधन व्यवस्था की भी है।
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