नालंदा, 16 अक्टूबर 2026। बिहार में शराब तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान एक उत्पाद सिपाही की जान चली गई। नालंदा जिले में शराब से भरी पिकअप वैन का पीछा कर रही उत्पाद विभाग की टीम पर बदमाशों ने गोली चला दी। इस घटना में सिपाही अजीत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान पटना के PMCH में उनकी मौत हो गई।
घटना पावापुरी-सिलाव हाईवे पर एक फ्लाईओवर के पास बुधवार देर रात हुई थी। घटना के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।
गुप्त सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, पटना स्थित उत्पाद खुफिया ब्यूरो को सूचना मिली थी कि एक पिकअप वैन में बड़ी मात्रा में शराब लादकर खराट मोड़ के रास्ते नालंदा लाई जा रही है। सूचना के आधार पर पटना से आई विशेष टीम और राजगीर उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने वाहन को रोकने के लिए पीछा शुरू किया।
इसी दौरान पावापुरी-सिलाव हाईवे पर फ्लाईओवर के पास टीम पर फायरिंग की गई। गोली लगने से सिपाही अजीत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, तस्करों को रास्ते और दूसरी तरह की मदद पहुंचाने वाले एक संदिग्ध व्यक्ति ने टीम पर गोली चलाई थी।
पहले पावापुरी, फिर पटना ले जाया गया
घायल सिपाही को पहले पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक, हमलावर पिकअप वैन लेकर मौके से फरार हो गए थे।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने घटना की पुष्टि की थी। उत्पाद विभाग और जिला पुलिस की टीम आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। पुलिस ने हाईवे और आसपास की सड़कों पर भी तलाश तेज की थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई थी। मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्करी चुनौती
बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है। राज्य में शराब का निर्माण, भंडारण, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अवैध शराब की तस्करी रोकना प्रशासन के सामने लगातार चुनौती बना हुआ है।
नालंदा की घटना ने शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि तस्करी के इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और कार्रवाई के दौरान टीम पर गोली चलाने वाले आरोपियों तक पुलिस कब पहुंचती है।