बिहार में खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता, 2 साल में 181 को मिली नियुक्ति; 86 महिलाएं भी शामिल

by Priya
cm nayab saini on Medal

पटना, 13 अक्टूबर 2026। बिहार में खेल के मैदान पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी हासिल करने के अवसर बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 181 खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति मिली है। इनमें 95 पुरुष और 86 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यानी इस योजना के तहत नौकरी पाने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 48 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बिहार में खेल को रोजगार से जोड़ने की सरकारी पहल को समझने के लिहाज से अहम है।

DSP से लेकर दारोगा तक बने खिलाड़ी

योजना के तहत पात्र खिलाड़ियों को उनकी खेल उपलब्धियों और निर्धारित नियमों के आधार पर सरकारी पदों पर सीधी नियुक्ति का अवसर दिया जाता है। इन पदों में पुलिस उपाधीक्षक (DSP), दारोगा, पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य उपयुक्त सरकारी पद शामिल हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप और मुकेश कुमार को भी उनकी खेल उपलब्धियों के आधार पर DSP बनाया गया है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ भविष्य के लिए रोजगार सुरक्षा देना है।

181 नियुक्तियों में 86 महिलाएं, क्या है इसका महत्व?

इस योजना के तहत नियुक्त हुए 181 खिलाड़ियों में 86 महिलाएं हैं। यह संख्या कुल नियुक्तियों का लगभग 47.5 प्रतिशत है। खेल में उपलब्धि हासिल करने के बाद सरकारी सेवा का अवसर मिलने से महिला खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा और पेशेवर पहचान मिल सकती है।

योजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, बिहार में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, केवल नियुक्तियों के आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राज्य में सभी खेलों या जिलों में महिलाओं को समान अवसर मिल रहे हैं। इसके लिए खेलवार और जिलावार आंकड़े भी जरूरी होंगे।

खिलाड़ियों को 3 लाख से 20 लाख रुपये तक सहायता

सरकारी नौकरी के अलावा बिहार में पात्र खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘प्रेरणा’, ‘सक्षम’ और ‘उत्कर्ष’ जैसी योजनाओं के तहत पात्र खिलाड़ियों को 3 लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।

इस तरह की मदद प्रशिक्षण, डाइट और प्रतियोगिताओं की तैयारी में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, हर खिलाड़ी को अधिकतम राशि मिलना तय नहीं है। सहायता की पात्रता और राशि संबंधित योजना के नियमों तथा स्वीकृति पर निर्भर करती है।

क्या यह योजना बिहार में खेल का भविष्य बदल सकती है?

खेल प्रतिभा होने के बावजूद कई खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, डाइट, यात्रा और प्रतियोगिताओं के खर्च के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकारी नौकरी का अवसर मिलने से उन्हें खेल जारी रखने के साथ भविष्य की आजीविका को लेकर भी सहारा मिल सकता है।

लेकिन इस पहल की सफलता केवल नियुक्तियों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना भी जरूरी होगा कि खिलाड़ियों को नियुक्ति के बाद खेल अभ्यास के लिए कितना समय और समर्थन मिलता है, राज्य में प्रशिक्षण सुविधाएं कितनी बेहतर होती हैं और नए खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के कितने अवसर मिलते हैं।

बिहार के खिलाड़ियों के लिए अहम बात: ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत दो वर्षों में 181 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिली है। इनमें 86 महिलाएं शामिल हैं। आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं, बशर्ते इन योजनाओं का लाभ पात्र खिलाड़ियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

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