प्रयागराज, 14 अक्टूबर 2026। सरकारी नौकरी की भर्ती में आवेदन समय पर भेजने के बावजूद अगर डाक विभाग की देरी के कारण दस्तावेज आखिरी तारीख के बाद पहुंचते हैं, तो इसकी सजा अभ्यर्थी को नहीं दी जा सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जब उम्मीदवार ने निर्धारित समय के भीतर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर दी हो और देरी उसके नियंत्रण से बाहर हुई हो, तो केवल डाक में देरी के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज करना उचित नहीं है।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने आयोग को संबंधित अभ्यर्थी की हार्ड कॉपी 16 अक्टूबर तक स्वीकार करने और भर्ती प्रक्रिया में उसकी उम्मीदवारी बनाए रखने का निर्देश दिया। यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन के साथ प्रिंटेड फॉर्म और दस्तावेज भी जमा करना अनिवार्य होता है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग में भर्ती से जुड़ा था। आयोग ने 18 अगस्त को भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन पूरा करने और निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए 1 सितंबर तक का समय दिया गया था।
इसके बाद आवेदन की हार्ड कॉपी और जरूरी दस्तावेज 15 सितंबर को शाम 5 बजे तक आयोग के कार्यालय पहुंचने चाहिए थे। नियमों के अनुसार, उम्मीदवार रजिस्टर्ड पोस्ट, स्पीड पोस्ट या व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज जमा कर सकते थे।
याचिकाकर्ता ने 31 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। उसने 8 सितंबर को रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से हार्ड कॉपी भी भेज दी थी। यानी दस्तावेज भेजने की कार्रवाई अंतिम तारीख से पहले की गई थी।
हालांकि, आवेदन आयोग के कार्यालय में 16 सितंबर को पहुंचा, जो निर्धारित समय से एक दिन बाद था। आयोग ने आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया और 21 सितंबर को उसे उम्मीदवार को वापस कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थी ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
डाक की देरी के लिए उम्मीदवार को जिम्मेदार क्यों नहीं माना गया?
सुनवाई के दौरान उम्मीदवार ने डाक विभाग की ट्रैकिंग रिपोर्ट के आधार पर बताया कि उसने आवेदन समय रहते भेज दिया था। उसने यह भी कहा कि दिल्ली और नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक डाक कार्यालयों के बंद रहने के कारण डिलीवरी प्रभावित हुई थी। यह अवधि 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान की थी।
आयोग की ओर से यह दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन में हार्ड कॉपी के पहुंचने की समय-सीमा तय थी और आवेदन उसके बाद प्राप्त हुआ था।
लेकिन हाईकोर्ट ने मामले में इस बात पर ध्यान दिया कि उम्मीदवार ने निर्धारित समय के भीतर अपनी ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी की थी। अदालत के सामने ऐसा कोई आधार नहीं था, जिससे यह साबित हो कि देरी अभ्यर्थी की लापरवाही के कारण हुई।
अदालत ने कहा कि जब भर्ती प्राधिकरण खुद रजिस्टर्ड पोस्ट और स्पीड पोस्ट से दस्तावेज भेजने की अनुमति देता है, तो डाक पहुंचने में हुई ऐसी देरी के लिए किसी अन्यथा सतर्क उम्मीदवार को भर्ती से बाहर करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने आयोग को क्या निर्देश दिया?
8 अक्टूबर के फैसले में हाईकोर्ट ने आयोग द्वारा आवेदन लौटाने के निर्णय को गलत माना। अदालत ने UPPSC को निर्देश दिया कि अभ्यर्थी की हार्ड कॉपी 16 अक्टूबर तक स्वीकार की जाए और उसकी उम्मीदवारी भर्ती प्रक्रिया में बरकरार रखी जाए।
इसका मतलब यह नहीं है कि भर्ती की समय-सीमा सभी उम्मीदवारों के लिए खत्म कर दी गई है या हर देर से पहुंचे आवेदन को स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इस मामले में राहत इसलिए दी गई क्योंकि उम्मीदवार ने दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर भेजे थे और देरी उसके नियंत्रण से बाहर होने के प्रमाण पेश किए गए थे।
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए क्या मायने हैं?
यह फैसला उन भर्तियों में खास महत्व रखता है, जहां ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद दस्तावेजों की हार्ड कॉपी भेजना भी जरूरी होता है। ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को आवेदन की अंतिम तारीख के साथ दस्तावेज भेजने और उनके पहुंचने से जुड़ी शर्तें भी ध्यान से पढ़नी चाहिए।
उम्मीदवारों के लिए कुछ जरूरी बातें:
- ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की रसीद सुरक्षित रखें।
- डाक से दस्तावेज भेजते समय रसीद और ट्रैकिंग नंबर संभालकर रखें।
- आवेदन भेजने की तारीख और डिलीवरी का स्टेटस जांचते रहें।
- देरी होने पर संबंधित भर्ती आयोग को समय रहते लिखित शिकायत या प्रतिनिधित्व दें।
- यदि आवेदन खारिज हो जाए, तो भर्ती के नियमों और अपने मामले के तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी सलाह लें।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है? भर्ती प्रक्रिया में समय-सीमा का पालन जरूरी है, लेकिन अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि उम्मीदवार की ओर से समय पर कार्रवाई किए जाने और उसके नियंत्रण से बाहर हुई डाक देरी के बीच अंतर किया जाना चाहिए। इससे भर्ती प्रक्रिया में प्रशासनिक नियमों के साथ निष्पक्षता का सवाल भी सामने आता है।
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