नई दिल्ली, 23 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफी कंटेंट के संबंध में कहा कि इस तरह का कंटेंट देखना, प्रकाशित करना या डाउनलोड करना सभी अपराध हैं। यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट के उस विवादास्पद निर्णय को रद्द करता है, जिसमें इसे अपराध के दायरे में नहीं रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफी कंटेंट के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने की, जिसमें चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र शामिल थे। अदालत ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द के स्थान पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री का उपयोग करे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों के खिलाफ हो रहे यौन अपराधों की गंभीरता को सही ढंग से दर्शाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफी कंटेंट के संबंध में सुनाया फैसला
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