पटना, 16 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में किशोर अपराधियों के खिलाफ गोली चलाने की नीति पर सवाल उठाते हुए सम्राट चौधरी का नाम लेते सुनाई दे रहे हैं। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके बयान की निंदा करते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।
क्या बोले प्रशांत किशोर?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह वीडियो 10 अक्टूबर को बिहार विधान परिषद चुनाव के प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। वीडियो में प्रशांत किशोर कहते सुनाई देते हैं कि यदि अपराधियों को गोली मारना ही रास्ता है, तो सम्राट चौधरी से बड़ा अपराधी कौन है।
किशोर की यह टिप्पणी बिहार में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सरकार की नीति पर उनके हमले के तौर पर सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता और चुनावी हलफनामे से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
BJP ने क्यों जताई आपत्ति?
बिहार BJP के नेताओं ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के दौरान हिंसा का संकेत देने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पार्टी ने प्रशांत किशोर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
BJP नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री के बारे में ऐसी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, इस विवाद के केंद्र में किशोर की सरकार की कानून-व्यवस्था संबंधी नीति पर आलोचना भी है।
MLC चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
यह विवाद बिहार में 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों के बीच सामने आया है। प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा है कि यह चुनाव सरकार बदलने के बजाय सरकार को जवाबदेह बनाने का अवसर है।
उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षकों की समस्याओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणी ने चुनावी बहस को और तीखा कर दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। BJP की मांग है कि प्रशांत किशोर सार्वजनिक माफी मांगें, जबकि विवाद की पृष्ठभूमि सरकार की अपराध-नियंत्रण नीति पर उनकी आलोचना से जुड़ी है। इस घटना से एक बार फिर सवाल उठा है कि चुनावी राजनीति में तीखी आलोचना और जिम्मेदार सार्वजनिक भाषा के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।