पटना, 14 अक्टूबर 2026। बिहार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन भुगतान से पहले उनके रिकॉर्ड की पूरी जांच की जाएगी। राज्य के वित्त विभाग ने अक्टूबर महीने का वेतन जारी करने से पहले कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े आंकड़ों का शत-प्रतिशत सत्यापन करने का निर्देश दिया है। यह फैसला वेतन भुगतान के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आने के बाद लिया गया है।
नवभारत टाइम्स की 12 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग को कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है। इस प्रक्रिया में उच्च शिक्षा विभाग को छोड़कर संबंधित कर्मचारियों के आंकड़ों का सत्यापन किया जाना है। इसलिए इसे बिहार के सभी विभागों के कर्मचारियों की सैलरी रोकने का आदेश समझना सही नहीं होगा।
भागलपुर में कैसे सामने आआई Rs 43 लाख की गड़बड़ी?
इस फैसले के पीछे भागलपुर जिले में ई-एचआरएमएस पोर्टल पर सामने आई वित्तीय अनियमितता को प्रमुख वजह बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पोर्टल पर एक महिला के नाम से फर्जी एंट्री दर्ज की गई थी। इस एंट्री के जरिए लगभग 43 लाख रुपये का गलत भुगतान हुआ। मामला सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच करने का फैसला लिया गया।
ई-एचआरएमएस एक डिजिटल प्रणाली है, जिसमें कर्मचारियों की जानकारी और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड रखे जाते हैं। यदि इसमें गलत जानकारी दर्ज हो जाए या जांच की प्रक्रिया में लापरवाही हो, तो सरकारी धन का गलत भुगतान होने का खतरा रहता है।
अक्टूबर की सैलरी कब मिलेगी?
वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक, अक्टूबर का वेतन अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जारी किया जाएगा। इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच बाकी है, उनके भुगतान में देरी हो सकती है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में सभी कर्मचारियों के वेतन जारी होने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर शिक्षक की सैलरी पूरे महीने नहीं आएगी। वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड के सत्यापन और संबंधित विभाग की भुगतान प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
किन दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच होगी?
वित्त विभाग ने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े आंकड़ों का पूरी तरह मिलान करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया में कर्मचारी की जानकारी, पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़े विवरण की जांच की जाएगी।
विभाग ने भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट करने को कहा है। यदि रिकॉर्ड में गलत एंट्री या अनुचित भुगतान मिलता है, तो यह पता लगाया जाएगा कि गलती किस स्तर पर हुई।
गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई
वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि वेतन भुगतान में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। गलत तरीके से अतिरिक्त भुगतान की गई राशि वापस लेने का भी निर्देश दिया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी धन के गलत इस्तेमाल को रोकना और वेतन भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाना है। लेकिन जांच के दौरान वास्तविक कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए रिकॉर्ड का समय पर सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट रखना भी जरूरी होगा।
शिक्षकों के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को फिलहाल अपने सेवा रिकॉर्ड और वेतन से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी सही रखने पर ध्यान देना चाहिए। यदि विभाग की ओर से किसी दस्तावेज या विवरण की पुष्टि मांगी जाती है, तो उसे समय पर उपलब्ध कराना उपयोगी होगा।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने रिकॉर्ड की जांच को वेतन जारी करने से पहले जरूरी बनाया है। अब भुगतान कब तक सामान्य होता है, यह सत्यापन की गति और विभागीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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