वैशाली, 14 अक्टूबर 2026। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। हादसा मंगलवार शाम रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ, जब नाव पर सवार लोग नदी पार कर दूसरे गांव में एक भोज में शामिल होने जा रहे थे। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। जिला प्रशासन ने मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए राघोपुर के अंचल अधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
हादसे में 13 बच्चों की मौत, छह लोगों का इलाज जारी
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के अनुसार, हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है। मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल हैं। छह लोगों को बचाकर पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, घायलों की हालत स्थिर बताई गई है।
हादसा मंगलवार रात करीब 8:30 बजे राघोपुर दियारा इलाके में हुआ। नाव पर कितने लोग सवार थे, इसे लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए। कुछ रिपोर्टों में नाव पर लगभग 20 लोग होने की बात कही गई, जबकि शुरुआती जानकारी में संख्या इससे अधिक भी बताई गई थी।
नाव में छेद होने की बात, जांच में सामने आएंगे कारण
हादसे में बचाए गए बच्चों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि नाव में छेद था और उसमें पानी भरने लगा था। इसके बाद नाव का संतुलन बिगड़ा और वह गंगा में पलट गई। हालांकि, दुर्घटना के सभी कारणों की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी और घटनाक्रम को लेकर अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
स्थानीय लोगों और बचाव दलों ने नदी में फंसे यात्रियों को निकालने की कोशिश की। घटना के बाद प्रशासन और आपदा राहत टीमों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। हादसे ने ग्रामीण इलाकों में नदी पार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली निजी नावों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
CO और थाना प्रभारी के वेतन पर रोक
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने राघोपुर के अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा है और उनके वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। प्रशासन ने नाव के मालिक और संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है। यह कदम शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई है; इससे अपने आप किसी अधिकारी या नाव संचालक की कानूनी जिम्मेदारी अंतिम रूप से साबित नहीं होती।
इस मामले में जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि निजी नाव का संचालन किन परिस्थितियों में किया जा रहा था और यात्रियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
मृतकों के परिवारों को छह लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और हादसे में घायल लोगों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की।
इस तरह मृतकों के परिजनों के लिए घोषित राज्य और केंद्र की सहायता राशि कुल छह लाख रुपये प्रति परिवार है। सहायता का वास्तविक भुगतान संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
ग्रामीण जल परिवहन की सुरक्षा पर फिर सवाल
बिहार के कई नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों को रोजमर्रा के काम, सामाजिक आयोजनों और बाजार तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में नाव की स्थिति, यात्रियों की संख्या, रात में संचालन और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे लोगों की जान से जुड़े हैं।
राघोपुर की घटना के बाद यह जरूरी हो गया है कि जांच में केवल दुर्घटना के तत्काल कारणों तक सीमित न रहा जाए, बल्कि निजी नावों के पंजीकरण, उनकी स्थिति और सुरक्षा नियमों के पालन की भी पड़ताल हो। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना भी महत्वपूर्ण होगा।
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