यूपी के 4 मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त, MBBS दाखिलों का मांगा पूरा हिसाब; 3 वरिष्ठ अधिकारी तलब

by Priya

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिलों और आरक्षण नियमों के पालन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने पूछा है कि 16 सितंबर 2026 तक आरक्षित वर्ग के कितने अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया था और इसके बाद कितने दाखिले हुए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी, चिकित्सा शिक्षा की महानिदेशक नेहा शर्मा और समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव को अगली सुनवाई में भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 14 अक्टूबर को होगी।

यह विवाद अंबेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की निर्धारित सीमा के भीतर दाखिले सुनिश्चित करने से जुड़ा है। अदालत यह जांच रही है कि राज्य सरकार ने पहले दिए गए आश्वासन और लागू आरक्षण कानून का पालन किया या नहीं।

किन चार मेडिकल कॉलेजों में है पूरा मामला?

हाईकोर्ट में जिन चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों के दाखिलों पर सुनवाई हो रही है, वे अंबेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन में स्थित हैं। विवाद इस बात को लेकर है कि इन संस्थानों में आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को प्रवेश देते समय निर्धारित आरक्षण प्रतिशत का पालन किया गया या नहीं।

अदालत ने पहले कहा था कि राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 से उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश संबंधी आरक्षण अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का पालन करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद तय सीमा से अधिक दाखिले दिए जाने की बात सामने आई थी।

आरक्षण का कितना प्रतिशत निर्धारित है?

उत्तर प्रदेश के संबंधित आरक्षण कानून के तहत अनुसूचित जाति (SC) के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है। इन तीनों श्रेणियों का कुल आरक्षण 50 प्रतिशत बनता है।

हाईकोर्ट ने इसी कानूनी व्यवस्था के संदर्भ में मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। अदालत का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि संबंधित संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।

16 सितंबर के आदेश के बाद कितने दाखिले हुए?

13 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने सरकार से दाखिलों का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा। इसमें विशेष रूप से यह बताने को कहा गया कि 16 सितंबर 2026 तक आरक्षित वर्ग के कितने अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया और उस तारीख के बाद कितने दाखिले हुए।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 16 सितंबर के अंतरिम आदेश के बाद इन चार मेडिकल कॉलेजों में संबंधित कानून के तहत निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से अधिक किसी भी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को प्रवेश नहीं दिया गया।

अब अदालत इस दावे और दाखिलों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंतरिम आदेश के बाद प्रवेश प्रक्रिया में क्या बदलाव हुए और पहले की स्थिति क्या थी।

सरकार के विभागों के बीच मतभेद पर भी उठे सवाल

मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि समाज कल्याण विभाग पहले दिए गए आश्वासन से सहमत नहीं था। इस पर अदालत ने सवाल किया था कि यदि विभागों के बीच मतभेद था, तो इसकी जानकारी पहले अदालत को क्यों नहीं दी गई।

पीठ ने यह भी कहा था कि सरकार के अलग-अलग विभागों के मतभेद को न्यायिक आदेश या सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का पालन न करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला केवल दाखिलों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी विभागों के बीच समन्वय और अदालत में दिए गए आश्वासन के पालन का सवाल भी शामिल है।

तीन वरिष्ठ अधिकारियों को फिर उपस्थित होना होगा

अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान संबंधित विभागों के दस्तावेज अपने पास रखे और तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बुधवार को फिर से उपस्थित रहने का निर्देश दिया। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी, चिकित्सा शिक्षा की महानिदेशक नेहा शर्मा और समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव शामिल हैं।

अगली सुनवाई में दाखिलों का विवरण, आरक्षण के अनुपालन और 16 सितंबर के अंतरिम आदेश के बाद की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।

मेडिकल छात्रों और एडमिशन प्रक्रिया पर क्या असर पड़ सकता है?

इस मामले का सीधा संबंध चार मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिलों की प्रक्रिया और आरक्षण नियमों के पालन से है। अदालत की समीक्षा से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित कॉलेजों में प्रवेश किस आधार पर दिए गए और क्या निर्धारित आरक्षण प्रतिशत का पालन हुआ।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी दाखिले रद्द होंगे, प्रवेश प्रक्रिया रोक दी जाएगी या किसी विशेष श्रेणी के उम्मीदवारों की सीटों में बदलाव होगा। अदालत ने फिलहाल विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है और मामले की सुनवाई जारी है।

अभ्यर्थियों को किसी भी संभावित बदलाव के बारे में अनुमान लगाने के बजाय अदालत के आदेश और आधिकारिक प्रवेश संबंधी सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए।

फिलहाल की सबसे अहम बात: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के तहत हुए MBBS दाखिलों का पूरा विवरण मांगा है। राज्य सरकार ने बताया है कि 16 सितंबर के अंतरिम आदेश के बाद निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से अधिक दाखिले नहीं हुए। अदालत अब रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी और मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।

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