पटना, 9 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद और तेज हो गया है। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने 2025 के विधानसभा चुनाव को रद्द करने और राज्य में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा SIR प्रक्रिया रोकने की मांग भी उठाई है।
राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में क्या कहा गया?
गुरुवार को आयोजित विरोध मार्च के बाद विपक्षी दलों ने बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन को ज्ञापन सौंपा। इसमें विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और समान अवसर को लेकर गंभीर सवाल हैं।
RJD नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हुआ है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में सभी दलों को समान अवसर देने की मांग की।
SIR क्या है और विवाद क्यों है?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करना है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना बताया जाता है। आरोपों और चुनाव प्रक्रिया की वैधता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
अब आगे क्या?
विपक्ष की मांगें राजनीतिक और कानूनी स्तर पर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ज्ञापन सौंपने से चुनाव अपने आप रद्द नहीं हो जाते। नए चुनाव कराने या परिणामों को चुनौती देने का फैसला संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।
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