पंजाब की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से सिंचाई पर आधारित है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में नहरों का व्यापक नेटवर्क होने के बावजूद कंडी और पहाड़ी क्षेत्रों के कई गांव लंबे समय तक सिंचाई सुविधाओं से वंचित थे। ऊंचाई वाले इलाकों तक नहर का पानी नहीं पहुंचने के कारण किसानों को ट्यूबवेल और वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहना पड़ता था। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। इन परियोजनाओं में काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना प्रमुख है। इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक नहर का पानी पहुंचाकर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है।
पंजाब के जल संसाधन एवं जल संरक्षण मंत्री वरिंदर कुमार गोयल के अनुसार, नहरों के अंतिम छोर (टेल्स) तक पानी की उपलब्धता 26 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। सरकार का कहना है कि नहरों की सफाई, मरम्मत और वितरण प्रणाली में सुधार के कारण पानी की उपलब्धता में यह वृद्धि दर्ज की गई है।
राज्य सरकार ने फाजिल्का क्षेत्र में 45.74 करोड़ रुपये की लागत से सात सिंचाई एवं आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत की है। इसके अलावा 33.51 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई तीन परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया है।
काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना को 214 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य कंडी क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों तक बिस्त-दोआब नहर प्रणाली से पानी पहुंचाना है।
परियोजना के पूरा होने पर लगभग 33 गांवों की 11,500 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो सकती है तथा खेती की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार के अनुसार, काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना को तीन चरणों में पूरा किया जा रहा है।पहला चरण 67 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2026 में पूरा हुआ, जिसके तहत 13 गांवों की लगभग 4,000 एकड़ भूमि को सिंचाई नेटवर्क से जोड़ा गया।
दूसरा चरण 107 करोड़ रुपये की लागत से सितंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। इसके माध्यम से 14 गांवों की लगभग 5,500 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
तीसरे चरण पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके पूरा होने पर छह गांवों की लगभग 2,000 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा।
कठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना को 67 क्यूसेक डिस्चार्ज क्षमता वाली बिस्त-दोआब नहर से जोड़ा गया है। परियोजना के तहत पंपिंग सिस्टम के माध्यम से पानी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा और वहां से बड़े पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए खेतों तक वितरित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, परियोजना से पहले बलाचौर विधानसभा क्षेत्र के 72 गांवों की 28,205 एकड़ भूमि तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध थी। योजना के पूर्ण होने के बाद यह दायरा बढ़कर 105 गांवों की लगभग 39,705 एकड़ भूमि तक पहुंचने का अनुमान है। यानी लगभग 11,500 एकड़ अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचाई नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
परियोजना के तहत खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 94 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है।
पंजाब सरकार के अनुसार, राज्य में सिंचाई ढांचे को मजबूत करने और नहरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब तक लगभग 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का दावा है कि पहले सिंचाई में नहर के पानी की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंच गई है।