चंडीगढ़, 04 अगस्त 2026: देश के युवाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ़ आवाज़ उठाते हुए और लोगों के साथ मज़बूती से खड़े होते हुए, सदन ने देश भर में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों के खिलाफ़ निंदा प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया।
प्रस्ताव पर बहस के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं ने करोड़ों छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है, जबकि न्याय मांगने वालों को जवाबदेही के बजाय आंसू गैस के गोले, पैलेट गन और पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पंजाब सरकार इस निंदा प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी, जिसमें केंद्र से पेपर लीक के मामलों को रोकने और देश की शिक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया जाएगा। गौरतलब है कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस सदन से वॉकआउट कर गई।
देश में पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं की निंदा करने वाले प्रस्ताव पर विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जो लोग देश को विश्व गुरु बनाने का दावा करते हैं, उन्होंने देश भर में पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं को रोकने में अपनी विफलता से शिक्षा प्रणाली का मज़ाक बना दिया है।
पेपर लीक, या दूसरे शब्दों में कहें तो परीक्षा के पेपरों की बिक्री, परीक्षार्थियों के सपनों को तोड़ देती है। इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि निराशा में 22 NEET परीक्षा के उम्मीदवारों ने आत्महत्या तक कर ली है। उन्होंने कहा कि जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है (2014 में), देश में 93 पेपर लीक हुए हैं।”
पेपर लीक से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “2019 और 2024 के बीच पेपर लीक के ऐसे मामलों की संख्या 65 थी और पेपर लीक की सबसे अधिक घटनाएं राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान हुईं।
प्रधानमंत्री, जो छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए टिप्स देते रहते हैं, पेपर लीक को रोकने में विफल रहे हैं। ऐसे प्रधानमंत्री से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिन्हें अपनी ही डिग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
छात्रों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “ये नेता अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए स्कूल का पाठ्यक्रम बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने ही प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया, क्योंकि वे देश में पेपर लीक को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। छात्रों के खिलाफ आंसू गैस, भारी पुलिस बल, पैलेट गन और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करके केंद्र सरकार की दादागिरी बेहद निंदनीय है।”
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