पटना, 18 जून 2026: भारत-नेपाल सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण सुरक्षा, प्रशासनिक और आर्थिक विषयों पर एक विस्तृत उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, नो-मेन्स लैंड (No Man’s Land) एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, गायब सीमा पिलर (Missing Border Pillars) जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर बिंदुवार समीक्षा की गई।
बिहार राज्य में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है । इस सीमा पर बिहार के 7 प्रशासनिक जिले पश्चिम चम्पारण (बेतिया), पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी), सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया एवं किशनगंज सहित 1 पुलिस जिला-बगहा हैं।
सीमा की सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस के 70 पुलिस थाने तथा सीमा सशस्त्र बल (SSB) की 194 सीमा चौकियां (BOPs) तैनात हैं । सीमा प्रबंधन के समन्वय के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेतृत्व में भारत-नेपाल संयुक्त कार्यदल की बैठक एवं गृह सचिव स्तरीय वार्ता नियमित रूप से की जाती है ।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0-15 किलोमीटर क्षेत्र और नो-मेन्स लैंड में अतिक्रमण संबंधी रिपोर्टों का स्वतंत्र सत्यापन कर सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में किसी भी नए अतिक्रमण को पनपने न दिया जाए ।
जिलों द्वारा नो-मेन्स लैंड में चिन्हित एवं हटाए गए अतिक्रमणों की प्रगति रिपोर्ट
1. पश्चिम चम्पारण:चिन्हित 272 अतिक्रमणों में से सभी हटा दिए गए हैं।
2. पूर्वी चम्पारण:चिन्हित 231 में से 229 हटाए गए (शेष: 02) ।
3. सीतामढ़ी:चिन्हित 139 में से 133 हटाए गए (शेष: 06) ।
4. मधुबनी:चिन्हित 245 में से सभी 245 हटाए गए (शेष: 0) ।
5. सुपौल:चिन्हित 101 में से 100 हटाए गए (शेष: 01) ।
6. अररिया:चिन्हित 336 में से सभी हटाए गए (शेष: 0) ।
7. किशनगंज:चिन्हित 35 में से 34 हटाए गए (शेष: 01) ।
राज्य में नो-मेन्स लैंड में कुल 1359 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 1349 को हटा दिया गया है और अब मात्र 10 अतिक्रमण शेष बचे हैं, जिन्हें जल्द हटाने का निर्देश दिया गया है ।
सीमा से 15 किमी के दायरे में सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण के आंकड़े
कुल स्थिति: कुल 996 चिन्हित अतिक्रमण मामलों में से अब तक 879 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 117 अतिक्रमण फिलहाल शेष हैं। लापता (Missing) और क्षतिग्रस्त (Damaged) सीमा स्तंभों की मरम्मत और रखरखाव के लिए गठित ‘फील्ड सर्वे टीम’ (FST) की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई|
भारत-नेपाल सीमा पर कुल 5343 पिलर अवस्थित हैं । 18 मई 2026 की स्थिति के अनुसार, इनमें से 3771 पिलर अच्छी स्थिति में हैं, 317 क्षतिग्रस्त हैं, 1155 लापता (Missing) श्रेणी में हैं तथा 100 पिलरों का निर्माण किया जाना अभी शेष है ।
पश्चिम चम्पारण के वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभ्यारण्य के भीतर स्थापित एसएसबी की 29 सीमा चौकियों (BOPs) में बुनियादी ढांचा विकास हेतु वन भूमि हस्तांतरण (Forest Clearance) की समीक्षा की गई।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार, इन 29 BOPs में से 17 कोर जोन में तथा शेष बफर जोन में स्थित हैं । सशस्त्र सीमा बल के क्षेत्रीय पदाधिकारी तथा जिला वन्य पदाधिकारी माह में दो बार अनिवार्य रूप से नियमित बैठक करेंगे । निर्माण कार्य केवल स्वीकृत फॉरेस्ट क्लीयरेंस क्षेत्र के भीतर ही होगा तथा एसएसबी द्वारा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में नियमित गश्त सुनिश्चित की जाएगी ।
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