नई दिल्ली, 04 जून 2025: दिल्ली के शाहदरा में स्थित एक गुरुद्वारे की जमीन को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह जमीन वक्फ की है और आजादी से पहले वहां मस्जिद थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गुरुद्वारा दशकों से वहां संचालित हो रहा है, इसलिए वक्फ बोर्ड को अपना दावा छोड़ देना चाहिए।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 2010 में वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज किया था। वक्फ बोर्ड के वकील संजय घोष ने तर्क दिया था कि निचली अदालतों ने वहां मस्जिद होने के दावे को स्वीकार किया था, और जमीन मस्जिद तकिया बब्बर शाह की थी, जो वक्फ को दी गई थी। दूसरी ओर, प्रतिवादी का कहना था कि यह संपत्ति वक्फ की नहीं है, क्योंकि इसके तत्कालीन मालिक मोहम्मद अहसान ने 1953 में इसे बेच दिया था।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने साफ कहा कि जब गुरुद्वारा वहां सुचारू रूप से चल रहा है, तो इसे बने रहने देना चाहिए। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को सलाह दी कि वह स्वयं इस दावे को वापस ले।
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