पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए केवल कानून लागू करना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि नशे से बाहर निकल चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सकारात्मक भूमिका देना भी महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने अपनी ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ मुहिम के अगले चरण के रूप में ‘सूरमा’ पहल की शुरुआत की है।
इस पहल का उद्देश्य उन युवाओं को सम्मानित करना है, जिन्होंने नशे पर काबू पाकर दो वर्ष से अधिक समय से नशा-मुक्त जीवन अपनाया है। कार्यक्रम के दौरान ऐसे युवाओं को विशेष रूप से तैयार की गई ‘सूरमा’ रिंग और टी-शर्ट देकर सम्मानित किया गया। सरकार का मानना है कि ये युवा अब समाज में ‘नशा मुक्ति के दूत’ के रूप में काम करेंगे और अन्य लोगों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘सूरमा’ पहल का मकसद नशा छोड़ चुके लोगों को केवल सम्मानित करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक भूमिका देना भी है। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार काम करेगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और समाज के लिए प्रेरणा बनें।
राज्य सरकार नशे के खिलाफ अभियान को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी रणनीति के तहत पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा और खेल गतिविधियों पर भी समान रूप से जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत करने और नशे से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है।
युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार ने खेल बुनियादी ढांचे के विस्तार की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 जुलाई तक पंजाब के लगभग 3,100 गांवों में खेल मैदान और 3,000 जिम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि खेल गतिविधियां युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने और उन्हें नशे से दूर रखने में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है और ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब पुलिस और आम लोगों के सहयोग से राज्य को नशा-मुक्त बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी।