नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025: सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में स्थानांतरित करने के आदेश ने देश में तीखी बहस छेड़ दी है। इस फैसले ने समाज को दो खेमों में बांट दिया है, जहां एक पक्ष इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष पशु कल्याण और एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों, 2023 के उल्लंघन के रूप में देख रहा है। इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तीन जजों की बेंच को सौंप दिया है, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया शामिल हैं। यह बेंच 14 अगस्त 2025 को इस मामले पर सुनवाई करेगी।
जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने सोमवार को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह के भीतर पकड़कर शेल्टर होम में रखने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन कुत्तों को स्टरलाइज और वैक्सीनेट करने के बाद भी सड़कों पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। इस आदेश को कोर्ट के पुराने फैसलों और एबीसी नियमों, जो स्टरलाइज्ड कुत्तों को उनकी मूल जगह पर छोड़ने की बात कहते हैं, के खिलाफ माना जा रहा है।
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