पंजाब में ‘प्रोजेक्ट जीवनजोत 2.0’, बाल भिक्षावृत्ति और तस्करी के खिलाफ अभियान, 704 बच्चों का रेस्क्यू

by Manu
डॉ. बलजीत कौर

पंजाब सरकार ने बाल भिक्षावृत्ति, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण की रोकथाम के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत ‘प्रोजेक्ट जीवनजोत’ और ‘प्रोजेक्ट जीवनजोत 2.0’ के माध्यम से सड़कों, चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वे किसी संगठित भिक्षावृत्ति गिरोह या बाल तस्करी के शिकार न हों।

पंजाब सरकार के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट जीवनजोत’ और ‘प्रोजेक्ट जीवनजोत 2.0’ के तहत अब तक कुल 704 बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति और शोषण की स्थिति से बचाया गया है।

रेस्क्यू किए गए बच्चों में से कई को उनके परिवारों से मिलाया गया है, जबकि अन्य बच्चों को उनकी परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल संरक्षण सेवाओं से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य इन बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास की मुख्यधारा में लाना है।

‘प्रोजेक्ट जीवनजोत 2.0’ की प्रमुख विशेषताओं में से एक डीएनए परीक्षण की व्यवस्था है। यदि किसी बच्चे के साथ मौजूद वयस्क के संबंध को लेकर संदेह होता है, तो दोनों के बीच जैविक संबंध की पुष्टि के लिए डीएनए जांच कराई जाती है।

सरकार का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बच्चे और उसके साथ मौजूद व्यक्ति के बीच पारिवारिक संबंध नहीं है, तो मामले की जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है।

पंजाब सरकार के निर्देश पर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रमुख बाजारों, ट्रैफिक चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों में बाल संरक्षण इकाइयां, पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।

रेस्क्यू अभियान के दौरान बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उनकी सामाजिक एवं पारिवारिक स्थिति का भी आकलन किया जाता है, ताकि आगे की पुनर्वास प्रक्रिया तय की जा सके।

सरकार का कहना है कि जिन बच्चों को रेस्क्यू किया जाता है, उन्हें शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई बच्चों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिला दिलाया गया है, ताकि वे नियमित शिक्षा से जुड़ सकें और दोबारा भिक्षावृत्ति या शोषण की स्थिति में न पहुंचें।

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