प्रयागराज, 18 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में किसानों को अब तक 77,800 सॉइल हेल्थ कार्ड यानी मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कृषि विभाग की इस पहल का उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करना और किसानों को जरूरत के अनुसार खाद व उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए जानकारी देना है।
खरीफ सीजन का लक्ष्य अक्टूबर में ही पूरा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में खरीफ सीजन के लिए प्रयागराज में 8,800 सॉइल हेल्थ कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभाग ने अक्टूबर में ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में वर्ष 2025 में 46,000 और वर्ष 2024 में 23,000 कार्ड तैयार किए गए थे। किसानों तक मिट्टी की जांच से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के लिए मुख्य प्रयोगशाला के अलावा जिले की पांच तहसीलों में भी मिट्टी जांच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
मिट्टी के 12 मानकों की होती है जांच
सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से मिट्टी के 12 मानकों का आकलन किया जाता है। इनमें मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों और उसकी गुणवत्ता से संबंधित जानकारी शामिल होती है। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि खेत में किस तरह के उर्वरक की कितनी जरूरत है।
ज्यादा रासायनिक खाद से मिट्टी को नुकसान
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिक उत्पादन की कोशिश में यूरिया और दूसरे रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवाणुओं और अन्य जीवों को नुकसान पहुंचने के साथ उसकी गुणवत्ता भी घट सकती है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को मिट्टी की स्थिति समझने और जरूरत के मुताबिक खाद के इस्तेमाल की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।