गोरखपुर, 27 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 18 वर्षीय छात्र करन कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली APK फाइलें तैयार करता था। पुलिस के मुताबिक, इन फाइलों के जरिए लोगों के मोबाइल फोन तक पहुंच बनाकर उनके बैंक खातों से पैसे निकालने की कोशिश की जाती थी। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले गई है।
करन मूल रूप से संतकबीरनगर जिले के धनघटा का रहने वाला है और गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में अपनी मां और बहन के साथ रहता था। रिपोर्ट के अनुसार, उसने यूट्यूब वीडियो देखकर प्रोग्रामिंग और कोडिंग सीखी थी।
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ा
पुलिस की जांच के मुताबिक, करन करीब आठ महीने पहले टेलीग्राम के एक ग्रुप से जुड़ा था। इसी ग्रुप के जरिए उसकी पहचान वाराणसी निवासी निशांत यादव से हुई। आरोप है कि निशांत ने उसे साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली APK फाइलें बनाने का काम दिया था।
पुलिस के अनुसार, इस काम के बदले करन को हर महीने 50 हजार रुपये दिए जाते थे। आरोपी के पास से एक लैपटॉप भी बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है।
लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर 17 लाख की ठगी
यह मामला पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर क्षेत्र में रहने वाले एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ा है। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने का झांसा दिया और एक APK फाइल डाउनलोड करने को कहा। फाइल डाउनलोड करने के बाद उनके बैंक खाते से 17 लाख रुपये निकाल लिए गए।
इस मामले में इसी महीने दिल्ली के हरिनगर साइबर थाने में केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस करन तक पहुंची।
लैपटॉप और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
पुलिस अब आरोपी के लैपटॉप में मौजूद फाइलों, कोड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि APK फाइलें किस तरह तैयार की गईं, उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया गया और ठगी की रकम किन बैंक खातों में गई।
पुलिस वाराणसी निवासी निशांत यादव की भूमिका और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी पर लगे आरोपों की जांच जारी है।