UCC पर बिहार NDA में मतभेद! अमित शाह के 2029 वाले बयान से JDU समेत सहयोगी दलों की अलग राय

by Priya
amit shah

Patna, 15 September: समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code को लेकर बिहार की राजनीति में NDA के भीतर अलग-अलग आवाजें सामने आने लगी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

लेकिन बिहार में NDA के सभी सहयोगी दल इस मुद्दे पर एक जैसी स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जनता दल यूनाइटेड यानी JDU ने बिहार में UCC को लेकर अलग रुख अपनाया है और किसी भी कानून पर चर्चा से पहले उसके प्रस्तावित draft को देखने की जरूरत बताई है।

बिहार की राजनीति में इस मुद्दे की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य में सामाजिक और धार्मिक रूप से विविध आबादी है। JDU लंबे समय से सामाजिक न्याय और विभिन्न समुदायों के हितों को अपनी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है।

वहीं NDA के अन्य सहयोगियों ने भी UCC को लेकर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर BJP का रुख स्पष्ट होने के बावजूद गठबंधन के राज्यों में इसके implementation को लेकर राजनीतिक बातचीत आसान नहीं होगी।

UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ क्षेत्रों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों को इसके संभावित दायरे में देखा जाता है।

बिहार में यह मुद्दा आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि राज्य की राजनीति में गठबंधन समीकरण लगातार बदलते रहते हैं। यदि केंद्र या NDA शासित राज्यों में UCC को लेकर ठोस legislative roadmap सामने आता है, तो बिहार के सहयोगी दलों की भूमिका और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल बिहार NDA में UCC को लेकर एक बात साफ है—राष्ट्रीय स्तर पर एक लक्ष्य की बात हो रही है, लेकिन बिहार में उस लक्ष्य तक पहुंचने के तरीके को लेकर पूरी सहमति अभी दिखाई नहीं दे रही।

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