हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है : आचार्य बद्री प्रसाद शास्त्री जी

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हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है : आचार्य बद्री प्रसाद शास्त्री जी

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है : आचार्य बद्री प्रसाद शास्त्री जी
आचार्य बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि इस साल भाद्रपद मास हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि भादो मास की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस दिन श्रीकृष्ण भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष आचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अष्टमी तिथि 26 अगस्त को सुबह 03 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को सुबह 02 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 26 अगस्त 2024, सोमवार को मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी।
आचार्य बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन मुहूर्त- इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5251वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। कृष्ण जन्माष्टमी के पूजन का शुभ मुहूर्त 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे से 27 अगस्त की देर सुबह 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारण का समय- धर्म शास्त्र के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारण का समय 27 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट के बाद किया जाएगा। वर्तमान में समाज में प्रचलित पारण मुहूर्त 27 अगस्त को देर सुबह 12 बजकर 44 मिनट के बाद किया जा सकेगा।

जयंती योग का शुभ संयोग
इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में होंगे जैसा की भगवान कृष्ण के जन्म के समय संयोग बना है। दरअसल, उस दिन भी चंद्रमा वृषभ राशि में ही थे। जिस रात में अष्टमी तिथि मध्यकाल में होती है उसी दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में होना बेहद ही शुभ फलदायी रहेगा। साथ में अगर जन्माष्टमी पर सोमवार या बुधवार हो जाए तो यह बहुत ही दुर्लभ संयोग बनाता है। बुधवार और सोमवार को जन्माष्टमी होने पर जयंती योग का शुभ संयोग बनता है। जिसे जयंती योग भी कहते हैं। दरअसल, जिस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था उस दिन बुधवार था। ठीक इससे छह दिन बाद यानी सोमवार को भगवान कृष्ण का नामकरण आदि कार्य किए गए थे। इसलिए जन्माष्टमी सोमवार या बुधवार में होना बेहद शुभ मानी जाती है।
जन्माष्टमी पर करें इन मित्रों का जाप भगवान कृष्ण की अटूट कृपा प्राप्त होगी ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ऊं कृं कृष्णाय नम:
क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः
ऊँ नमः भगवते श्रीगोविन्दायः
ऐं क्लीं कृष्णाय हृीं गोविंदाय श्रीं गोपीजनवल्लभाय स्वाहा ह्नसों

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