यूपी के कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करेगी STF, हाईकोर्ट का आदेश

by Priya

लखनऊ, 18 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का व्यापक सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी शामिल होगी।

अदालत ने शिक्षकों को अपने शैक्षणिक दस्तावेज और नियुक्ति पत्र एक सप्ताह के भीतर संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) के पास जमा करने को कहा है। साथ ही, उन्हें शिक्षा विभाग में BSA या उससे ऊपर के पदों पर कार्यरत या सेवानिवृत्त अपने निकट संबंधियों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से देनी होगी।

4 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

इंडियन एक्सप्रेस की 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने 16 अक्टूबर को यह आदेश दिया था। अदालत ने STF को जांच प्रक्रिया तेजी से पूरी करने और 4 नवंबर को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने शिक्षा विभाग के निदेशक और STF के अतिरिक्त महानिदेशक को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने को कहा है। अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरतने पर व्यक्तिगत जवाबदेही तय किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।

किन दस्तावेजों की होगी जांच?

शिक्षकों को नियुक्ति पत्र के साथ हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी या डीएलएड जैसे प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET/CTET) से संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। नियुक्ति के समय लागू अन्य जरूरी योग्यताओं के प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में आएंगे।

जिला स्तर पर BSA शिक्षकों के नाम, नियुक्ति की तारीख, शैक्षणिक योग्यता और संबंधित भर्ती में प्राप्त मेरिट सहित जरूरी जानकारी संकलित करेंगे। इसके बाद विवरण संबंधित STF रेंज कार्यालय को भेजे जाएंगे।

फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी पाने का मामला

हाईकोर्ट एक ऐसे शिक्षक की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिस पर कथित तौर पर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप है। इसी मामले में अदालत ने राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जरूरत पर जोर दिया।

अदालत ने कहा कि STF की जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षकों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों या दूसरे व्यक्तियों के प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके नौकरी हासिल की। कुछ मामलों में एक ही शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर दस या उससे अधिक लोगों की नियुक्ति होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

फर्जी नियुक्ति साबित होने पर पहले भी दिए गए थे निर्देश

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने फर्जी तरीके से नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने, उनसे वेतन की वसूली करने और इसमें सहयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

नए आदेश में अदालत ने सरकारी प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की जवाबदेही को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। अदालत का मानना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की योग्यता, ईमानदारी और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

अब शिक्षकों और शिक्षा विभाग की नजर 4 नवंबर पर

इस आदेश के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्तियों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच का आदेश दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई है। किसी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई जांच में सामने आए तथ्यों और संबंधित नियमों के आधार पर ही होगी।

अब 4 नवंबर की सुनवाई में अदालत के सामने पेश की जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इससे पता चलेगा कि शिक्षा विभाग और STF ने दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में कितनी प्रगति की है।

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