घर का बना पनीर भी हमेशा सुरक्षित नहीं, खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

by Priya

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: पनीर भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है। सब्जी, पराठे, स्नैक्स और कई अन्य व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन पनीर की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर उपभोक्ताओं के मन में अक्सर सवाल रहते हैं। कई लोग मानते हैं कि घर पर बना पनीर बाजार में मिलने वाले पनीर से हमेशा अधिक सुरक्षित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल घर पर बनाया जाना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

पनीर की गुणवत्ता कई बातों पर निर्भर करती है—दूध की गुणवत्ता, इस्तेमाल किए गए बर्तनों की स्वच्छता, बनाने की प्रक्रिया और तैयार उत्पाद को किस तापमान पर रखा गया है। यदि दूध या उपकरण साफ नहीं हैं, या पनीर को लंबे समय तक सही तापमान पर नहीं रखा जाता, तो घर पर बना उत्पाद भी असुरक्षित हो सकता है।

बाजार से पनीर खरीदते समय पैकेट की सील, निर्माण और उपयोग की तारीख, भंडारण के निर्देश और निर्माता की जानकारी देखनी चाहिए। खुले पनीर के मामले में यह ध्यान देना जरूरी है कि उसे साफ तरीके से संभाला गया है और उचित तापमान पर रखा गया है। केवल रंग या बनावट देखकर उसकी वास्तविक गुणवत्ता का पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

इस मुद्दे पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से डेयरी जैसे दिखने वाले, लेकिन गैर-डेयरी विकल्पों से बने उत्पादों को “पनीर” नाम से बेचने पर रोक लगाने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। प्रस्ताव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक सामग्री के बारे में भ्रम से बचाना है। इसे अंतिम लागू नियम मानने से पहले संबंधित आधिकारिक अधिसूचना की स्थिति देखना जरूरी है।

उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे उत्पाद के नाम और पैकेजिंग से आगे बढ़कर उसकी सामग्री, स्रोत और भंडारण पर ध्यान दें। यदि पनीर में असामान्य गंध, रंग या बनावट दिखाई दे, तो उसे खाने से बचना चाहिए। खाद्य पदार्थों की सही हैंडलिंग और समय पर रेफ्रिजरेशन उनकी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह भी देखें: लगातार मल्टीटास्किंग करने से घट सकती है प्रोडक्टिविटी, जानें फोकस बढ़ाने के तरीके

You may also like