Nepal Glacier Collapse: Climate Change से बढ़ा विनाश का खतरा, वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट

by Priya
Nepal flash Flood

New Delhi,  17 September 2026: नेपाल में 26 अगस्त 2026 को हुई एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा को लेकर वैज्ञानिकों का नया विश्लेषण सामने आया है। World Weather Attribution की रिपोर्ट के अनुसार, इंसानी गतिविधियों से बढ़ रही global warming ने उस इलाके में मौजूद ग्लेशियर और पहाड़ी चट्टानों को अस्थिर बनाने में योगदान दिया हो सकता है।

इस आपदा में हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े हिस्से की चट्टान और उसके ऊपर मौजूद ग्लेशियर के टूटकर नीचे गिरने से भारी तबाही हुई थी। इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया।

Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए गए हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आपदा का एकमात्र कारण Climate Change नहीं था। 2015 में नेपाल में आया बड़ा भूकंप भी पहाड़ी चट्टानों को कमजोर करने वाले कारकों में शामिल हो सकता है।

वैज्ञानिक विश्लेषण में बताया गया है कि बढ़ते तापमान के कारण glaciers के पतले होने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में permafrost यानी लंबे समय से जमी हुई जमीन के पिघलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इससे उन पहाड़ी ढलानों की स्थिरता प्रभावित होती है, जो लंबे समय तक बर्फ और जमी हुई जमीन से मजबूत बनी रहती हैं।

Langtang Lirung glacier के पीछे हटने का उदाहरण भी रिपोर्ट में सामने आया है। विश्लेषण के मुताबिक, यह ग्लेशियर 1990 के दशक से लगभग आधा किलोमीटर पीछे हट चुका है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने इस घटना को केवल “जलवायु परिवर्तन से हुई आपदा” के रूप में परिभाषित नहीं किया है। उनका कहना है कि कई भूगर्भीय और पर्यावरणीय कारकों ने मिलकर परिस्थितियां तैयार कीं। Climate Change ने इनमें से कुछ जोखिमों को बढ़ाने में भूमिका निभाई हो सकती है।

इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हिमालय केवल नेपाल के लिए ही नहीं बल्कि भारत, चीन, भूटान और पाकिस्तान सहित कई देशों के लिए महत्वपूर्ण जल संसाधनों का क्षेत्र है।

वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ऐसे संवेदनशील इलाकों की बेहतर निगरानी करना है। Satellite monitoring, glacier tracking और early-warning systems को मजबूत करके भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

नई रिपोर्ट का व्यापक संदेश यह है कि हिमालय में बदलती जलवायु परिस्थितियों को केवल तापमान बढ़ने के रूप में नहीं देखा जा सकता। ग्लेशियरों का पीछे हटना, permafrost का पिघलना और पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता आने वाले वर्षों में आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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