नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit के समापन के बाद इसके राजनीतिक प्रभाव पर भी चर्चा शुरू हो गई है। भारत की अध्यक्षता में हुए शिखर सम्मेलन में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और Global South के देशों के नेताओं की मौजूदगी रही।
राजनीतिक विश्लेषणों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या BJP इस सम्मेलन को अपनी सरकार की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के उदाहरण के रूप में चुनावी अभियानों में इस्तेमाल करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान भारत की भूमिका को विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और Global South के हितों से जोड़कर प्रस्तुत किया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मोदी की मुलाकातों ने भी सम्मेलन को व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बनाया।
BJP के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि पार्टी लंबे समय से भारत की वैश्विक स्थिति को अपनी सरकार की उपलब्धियों से जोड़ती रही है। BRICS की विस्तारित सदस्यता और सम्मेलन में हुए समझौतों को इसी narrative का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हालांकि विपक्ष की ओर से यह सवाल भी उठ सकता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने वाली कूटनीतिक सफलता का वास्तविक आर्थिक और घरेलू प्रभाव आम नागरिकों तक कितना पहुंच रहा है।
इसलिए आने वाले समय में BRICS Summit की उपलब्धियों का राजनीतिक इस्तेमाल केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहेगा। इसे भारत की वैश्विक स्थिति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक संदेश के साथ जोड़े जाभाने की संवना है।