लखनऊ, 18 फरवरी 2025: Udit Raj Controversial Remarks on Mayawati: पूर्व लोकसभा सांसद उदित राज ने BSP प्रमुख मायावती पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने “सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया है” और अब उनका “गला घोंटने का समय आ गया है”। सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अपनी टिप्पणी में महाभारत के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अर्जुन ने भगवान कृष्ण से अपने रिश्तेदारों को मारने के बारे में पूछा था, वैसे ही भगवान कृष्ण ने उन्हें कहा था कि “न्याय के लिए लड़ो और अपने ही लोगों को मार डालो”।
Udit Raj की आपत्ति और राजनीतिक संदर्भ
राज ने आगे कहा, “आज मेरे कृष्ण ने मुझसे कहा है कि पहले अपने दुश्मन को मारो। और, सामाजिक न्याय की दुश्मन, सुश्री मायावती, जिन्होंने सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया, अब उनका गला घोंटने का समय आ गया है।” जब इस बयान पर सवाल उठाए गए, तो राज ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब “राजनीतिक मौत” से था, न कि किसी शारीरिक हिंसा से। उन्होंने कहा, “राजनीतिक संदर्भ में आमतौर पर राजनीतिक मौत या लोकतंत्र की हत्या का उल्लेख किया जाता है, और इसे उसी तरीके से लिया जाना चाहिए।”
Udit Raj Controversial Remark: कृष्ण का संदर्भ और राजनीतिक तर्क
राज ने अपने बयान में कृष्ण का संदर्भ देते हुए कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने उनका समर्थन करते हुए कहा था, “मुझे मेरा अर्जुन मिल गया है,” और राज ने भी इसे मानते हुए कहा, “वे हमारे ‘कृष्ण’ हैं।” उनका कहना था कि न्याय के लिए अर्जुन को कृष्ण ने मार्गदर्शन दिया था, भले ही इसका मतलब खुद के खिलाफ ही क्यों न हो।
बहुजन समाज के आंदोलन का गला घोटने का आरोप
राज ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बहुजन समाज के आंदोलन का गला घोंट दिया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ताओं ने अपनी मेहनत से पार्टी और आंदोलन को खड़ा किया था। उन्होंने कहा कि मायावती की “क्रूरता और अक्षमता” के बावजूद कार्यकर्ता और मतदाता लगातार संघर्ष करते रहे।
दलित और मुस्लिम समुदाय की स्थिति पर बयान
राज ने मुस्लिम समुदाय की स्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा कि आज मुस्लिम समुदाय उसी दौर से गुजर रहा है, जिस दौर में दलित एक समय बुरी स्थिति में थे। उनका कहना था, “मुस्लिम समुदाय अकेले इस स्थिति से नहीं लड़ सकता। दलित भी अकेले सक्षम नहीं हैं।”
बहुजन समाज पार्टी और कांशीराम का योगदान
राज ने कांशीराम के बहुजन जागरण की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि यह आंदोलन 2000 के दशक तक अपने चरम पर पहुंचा था, लेकिन इसकी सोच और आधार हमेशा सामाजिक न्याय था।
आने वाली रैली और डोमा परिषद की भूमिका
राज ने 1 दिसंबर 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में डोमा परिषद की पहली रैली आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें वक्फ बोर्ड को बचाने की मांग उठाई जाएगी। वे वर्तमान में दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी (डोमा) परिषद के अध्यक्ष हैं।
संगठनात्मक बदलाव की आवश्यकता
राज ने बहुजन समाज के संगठनों पर भी टिप्पणी की और कहा कि अब समय आ गया है जब इन संगठनों को जाति और व्यक्ति के आधार पर नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधित्व के आधार पर चलाना चाहिए। उन्होंने कहा, “डोमा परिसंघ के संगठनात्मक ढांचे में हर स्तर पर चार लोगों – एक दलित, एक ओबीसी, एक मुस्लिम और एक आदिवासी – का होना अनिवार्य होगा।”
उदित राज की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि वे बहुजन समाज के आंदोलन को नए दिशा में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और मायावती के नेतृत्व को चुनौती देते हुए एक मजबूत बदलाव की आवश्यकता की बात कर रहे हैं।
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