पटवा टोली , 21 अप्रैल 2025: बिहार के गया जिले में बुनकरों की बस्ती पटवा टोली एक बार फिर शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सुर्खियों में आ गई है। इस इलाके के 40 से अधिक छात्रों ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा JEE मेन 2025 के दूसरे सत्र को पास कर लिया है। जिसके परिणाम 19 अप्रैल को घोषित किए गए थे। ये सभी छात्र अब 18 मई को होने वाली JEE एडवांस्ड परीक्षा में शामिल होंगे।
इंजीनियरिंग के इच्छुक लोगों का केंद्र बना
कभी मुख्य रूप से हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाने वाला पटवा टोली अब इंजीनियरिंग के इच्छुक लोगों का केंद्र बन गया है। पिछले 25 वर्षों में इस गांव ने दर्जनों आईआईटीयनों को जन्म दिया है और इसे अक्सर बिहार की “ITI Factory” के रूप में जाना जाता है।
इस वर्ष सफल उम्मीदवारों में सागर कुमार भी शामिल हैं जिन्होंने युवावस्था में ही अपने पिता को खो दिया था। आर्थिक और भावनात्मक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने वृक्षा नामक एक गैर सरकारी संगठन के सहयोग से 94.8% अंक प्राप्त किये है।
इन छात्रों की उपलब्धियों से उनके परिवारों को अपार खुशी और समुदाय को गौरव प्राप्त हुआ है। उनकी कहानियाँ सिर्फ अकादमिक सफलता के बारे में नहीं हैं।बल्कि विपरीत परिस्थितियों पर काबू पाने के बारे में भी हैं।
पटवा टोली के परिवर्तन की यात्रा
पटवा टोली के परिवर्तन की यात्रा 1991 में शुरू हुई जब जितेंद्र पटवा आईआईटी में प्रवेश पाने वाले गांव के पहले छात्र बने थे। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर कई अन्य लोगों ने भी उनका अनुसरण किया। आज ऐसा कहा जाता है कि पटवा टोली के लगभग हर घर में कम से कम एक इंजीनियर है।
गांव के आईआईटी पूर्व छात्रों द्वारा 2013 में स्थापित ‘वृक्ष’ फाउंडेशन इस प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संगठन जेईई उम्मीदवारों के लिए मुफ्त कोचिंग प्रदान करता है, अध्ययन सामग्री प्रदान करता है और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से छात्रों को देश भर के विशेषज्ञ संकाय से जोड़ता है।
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