कानून में पत्नी को पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट

by Manu
दिल्ली हाई कोर्ट साकेत गोखले

नई दिल्ली, 22 मई 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो एक पत्नी को अपने पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराने की अनुमति दे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 को भी रद्द कर दिया, जो पति के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप में लगी थी।

पत्नी की शिकायत के आधार पर दिल्ली की निचली अदालत ने पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए दंड) लगाने का आदेश दिया। जिसके खिलाफ पति ने दिल्ली हाई कोर्ट  में अपील की। दिल्ली हाई कोर्ट ने पति की दलीलों को स्वीकार कर लिया और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। यह भी स्पष्ट किया गया कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो पत्नी को अपने पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराने की अनुमति देता हो, अर्थात कानून वैवाहिक बलात्कार की अवधारणा को मान्यता नहीं देता है।

पत्नी ने अपने पति पर मुख मैथुन करने का आरोप लगाया। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके साथ यह अप्राकृतिक संबंध जबरन बनाया गया था या स्वेच्छा से। पत्नी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उसका पति नपुंसक है और यह विवाह उसके परिवार से पैसे ऐंठने के लिए किया गया है।

ये भी देखे: लंबित मामलों पर CJI बी आर गवई का बड़ा बयान, कहा- ‘वकील काम नहीं करना चाहते और…’

You may also like