बार-बार लगती है भूख? हर मील में प्रोटीन शामिल करने से मिल सकती है मदद, डॉक्टर ने समझाया कैसे

by Priya

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। खाना खाने के कुछ ही समय बाद दोबारा भूख लगना, बार-बार कुछ खाने का मन करना या शाम होते-होते स्नैक्स की क्रेविंग बढ़ जाना कई लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी है। ऐसे में लोग अक्सर अपनी इच्छाशक्ति को जिम्मेदार मान लेते हैं, जबकि भोजन में मौजूद पोषक तत्व भी यह तय करने में भूमिका निभाते हैं कि पेट कितनी देर तक भरा महसूस होगा।

13 अक्टूबर को प्रकाशित The Indian Express की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रोटीन भूख और पेट भरा महसूस करने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और केवल प्रोटीन बढ़ाने से सभी की भूख या वजन से जुड़ी समस्याएं हल नहीं हो जातीं।

प्रोटीन खाने के बाद देर तक पेट भरा क्यों महसूस हो सकता है?

प्रोटीन शरीर के ऊतकों की मरम्मत, मांसपेशियों के रखरखाव और कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन होने से पेट भरा महसूस करने में भी मदद मिल सकती है।

इस प्रक्रिया में भूख और तृप्ति से जुड़े हार्मोन की भूमिका होती है। घ्रेलिन को आमतौर पर भूख से जुड़े हार्मोन के रूप में जाना जाता है। वहीं, GLP-1 और PYY जैसे हार्मोन भोजन के बाद तृप्ति के संकेत देने में शामिल होते हैं।

प्रोटीन का सेवन इन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन भोजन की मात्रा, उसमें मौजूद फाइबर और फैट, शारीरिक गतिविधि तथा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण हैं।

क्या हर बार भूख लगने पर प्रोटीन शेक पीना चाहिए?

सोशल मीडिया पर प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट्स को फिटनेस से जोड़कर खूब प्रचारित किया जाता है। लेकिन प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए हर व्यक्ति को पाउडर या सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है।

भारतीय खानपान में कई ऐसे विकल्प हैं जिनसे प्रोटीन मिल सकता है। इनमें दालें, चना, राजमा, दूध, दही, पनीर, सोया और अंडे शामिल हैं। मांसाहारी भोजन करने वाले लोग अपनी पसंद के अनुसार मछली और अन्य प्रोटीन स्रोत भी शामिल कर सकते हैं।

प्रोटीन सप्लीमेंट कुछ लोगों के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसकी जरूरत उम्र, भोजन की आदतों, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए। किडनी की बीमारी जैसी स्थिति में प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह से तय करना विशेष रूप से जरूरी है।

भारतीय खाने में प्रोटीन कैसे बढ़ाएं?

अपनी डाइट में बड़े बदलाव किए बिना भी भोजन की संरचना बेहतर की जा सकती है।

नाश्ते में: पोहा के साथ मूंगफली, दूध या दही, बेसन का चीला अथवा अंडे जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।

दोपहर के भोजन में: रोटी या चावल के साथ दाल, राजमा, छोले, दही या पनीर रखने से भोजन में प्रोटीन के स्रोत बढ़ सकते हैं।

शाम के स्नैक्स में: बिस्कुट या चिप्स की जगह भुना चना, दही, दूध या बिना ज्यादा चीनी वाला कोई उपयुक्त विकल्प चुना जा सकता है।

रात के खाने में: सब्जियों के साथ दाल, पनीर, टोफू या अपनी पसंद के दूसरे प्रोटीन स्रोत शामिल किए जा सकते हैं।

ये उदाहरण सामान्य खानपान के सुझाव हैं। किसी व्यक्ति के लिए सही मात्रा उसकी ऊर्जा और पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करती है।

 

सिर्फ प्रोटीन पर ध्यान देना भी पर्याप्त नहीं

आजकल प्रोटीन की मात्रा गिनने का चलन बढ़ा है, लेकिन संतुलित आहार में दूसरे पोषक तत्वों की भी उतनी ही अहमियत है। यदि प्रोटीन बढ़ाने के चक्कर में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर को नजरअंदाज किया जाए, तो भोजन असंतुलित हो सकता है।

फाइबर पाचन और पेट भरा महसूस करने में मदद करता है। इसलिए भोजन में प्रोटीन के साथ दालें, फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना उपयोगी है।

लगातार भूख लगना हमेशा प्रोटीन की कमी का संकेत नहीं होता। नींद की कमी, तनाव, भोजन के बीच लंबा अंतराल और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी भूख को प्रभावित कर सकती हैं। यदि भूख में अचानक बदलाव आए या इसके साथ अन्य लक्षण हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

भूख को समझें, सिर्फ कैलोरी न गिनें

स्वस्थ खानपान का लक्ष्य केवल कम खाना नहीं, बल्कि शरीर की जरूरतों के मुताबिक पर्याप्त और संतुलित पोषण लेना भी है। हर मील में प्रोटीन का उपयुक्त स्रोत, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ और नियमित भोजन की आदत कई लोगों को बेहतर तृप्ति महसूस करने में मदद कर सकती है।

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