मुल्तानी मल्ल मोदी कॉलेज, पटियाला में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में “हिंदी साहित्य की समृद्ध परम्परा” विषय पर विशेष-भाषण का आयोजन

by TheUnmuteHindi
मुल्तानी मल्ल मोदी कॉलेज, पटियाला में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में “हिंदी साहित्य की समृद्ध परम्परा” विषय पर विशेष-भाषण का आयोजन

मुल्तानी मल्ल मोदी कॉलेज, पटियाला में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में “हिंदी साहित्य की समृद्ध परम्परा” विषय पर विशेष-भाषण का आयोजन
पटियाला : स्थानीय मुल्तानी मल्ल मोदी कालेज, पटियाला में हिन्दी विभाग की ओर से प्रधानाचार्य डॉ. नीरज गोयल जी के योग्य मार्गदर्शन अधीन हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में “हिंदी साहित्य की समृद्ध परम्परा” विषय पर विशेष-भाषण का आयोजन किया गया। इस विशेष-भाषण में डॉ. सुरेश नायक पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग, पटेल मेमोरियल नेशनल कॉलेज, राजपुरा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीरज गोयल ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया और इस आयोजन में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकि विकास के दौर में हिन्दी भाषा अपनी वैज्ञानिकता और समृद्धि के कारण ज्ञान-विज्ञान और कम्प्यूटर की भाषा बनने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि हिंदी न केवल राष्ट्रीय भाषा के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करती है बल्कि इसने समूचे राष्ट्र को भी एकता के सूत्र में पिरोये रखा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक भाषा नयी तकनीक को अंगीकार करने में निपुण होनी चाहिए और उसका साहित्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सार्वभौमिक होना चाहिए और हिंदी ऐसी ही समर्थ भाषा है।
मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश नायक ने समकालीन परिवेश में हिन्दी के महत्त्व को उजागर करते हुए उसके समक्ष प्रस्तुत होने वाली चुनौतियों से अवगत करवाया। उन्होंने हिन्दी को भारतीय भाषाओं की सहचरी बताते हुए हिंदी साहित्य की समृद्ध परम्परा को उजागर किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा के विविध कालखण्डों के साहित्य और वर्तमान जीवन में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा और साहित्य ने न केवल देश की अन्य भाषाओं के साहित्य को प्रभावित किया बल्कि उनके प्रभाव को स्वयं भी ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं के साहित्य में अंतर-संवाद की संवाहक के रूप में भी हिंदी ने अपने राष्ट्रीय महत्त्व को उजागर किया है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने भाषा और साहित्य की कई गतिविधियों में भाग लिया। इन गतिविधियों में प्रमुख थीं – पठन, भाषण तथा काव्योच्चारण, जिनमें भाग लेने वाले छात्रों ने हिन्दी के महत्त्व को उजागर करते हुए वर्तमान समय में उसके समक्ष प्रस्तुत होने वाली चुनौतियों से अवगत करवाया। आयोजित गतिविधियों में ज्योति, नेहा, कृष्णं यदुवंशी, गुरजंट सिंह, आदि छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। डॉ. रुपिन्द्र शर्मा ने हिन्दी को भारत की सांस्कृतिक भाषा के रूप में रेखांकित करते हुए उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और हिंदी दिवस के महत्त्व पर प्रकाश डाला। समारोह के अंत में उन्होंने सभी श्रोताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम ही नहीं बल्कि व्यक्तित्व-निर्माण का बहुत बड़ा घटक है। मनुष्य की अभी तक की खोजों में भाषा की खोज उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है क्योंकि भाषा ने मनुष्य को सामाजिक संरचना में बांधा है। इस समारोह में विद्यार्थी और अध्यापक काफी संख्या में उपस्थित रहे।

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