Shardiya Navratri 2025 Day 2 Katha: शारदीय नवरात्रि का यह पावन पर्व हर घर में उत्साह और भक्ति की लहर ले आता है। मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आज, 23 सितंबर 2025 को नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन उनकी कथा का श्रवण और विधि-पूर्वक पूजन करने से व्रत का पूरा पुण्य फल प्राप्त होता है। तो चलिए, पौराणिक ग्रंथों की रोचक कथा के माध्यम से मां की तपस्या की महिमा को समझते हैं।
ब्रह्मचारिणी माता की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी भगवान हिमालय और देवी मैना की सती पुत्री हैं। बचपन से ही भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी भक्ति थी। एक बार नारद मुनि के आशीर्वाद और सलाह पर उन्होंने शिव को अपने जीवनसाथी के रूप में पाने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अत्यंत कठिन तपस्या का व्रत धारण किया, जिसकी वजह से वे तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हुईं।
पहले तीन हजार वर्षों तक उन्होंने केवल फल-फूल और टूटे हुए बेल पत्र ही ग्रहण किए। हर प्रकार के कष्ट सहते हुए भी उनका मन शिव भक्ति में अटल रहा। फिर, उन्होंने भोजन तक त्याग दिया और हज़ारों वर्षों तक निर्जल, निराहार तपस्या जारी रखी। इस अपार संयम के कारण उनका एक और नाम ‘अपर्णा’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘जो कुछ न ले’।
इस घोर साधना को देखकर स्वर्ग के देवता, ऋषि-मुनि आश्चर्यचकित हो उठे। उन्होंने उनकी तपस्या की भूरि-भूरि प्रशंसा की और भविष्यवाणी की कि यह निश्चित रूप से सफल होगी। वाकई, समय आने पर भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर उन्हें स्वीकार किया, और वे पार्वती के रूप में शिव-पत्नी बनीं। ऐसा विश्वास है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।

ब्रह्मचारिणी माता के की स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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