हिमाचल,30 जुलाई,2025: हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरूआत से ही लगातार बारिश, बादल फटना, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों की गोद में बसे सैकड़ों गाँव खतरे की जद में आ गए हैं। इस प्राकृतिक त्रासदी में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं। नुक्सान का दायरा सिर्फ जनहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि मवेशी, सड़कें, घर और सरकारी ढांचे भी इसकी चपेट में आकर तबाह हो चुके हैं।
सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में, 35 लोगों की मौत
प्रदेश में 20 जून से अब तक बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं में 170 लोगों की जान जा चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 278 लोग घायल हुए हैं, जबकि 36 लोग अब भी लापता हैं। प्रदेश भर में सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मंडी रहा, जहाँ 35 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा अब भी 37 लोग लापता बताए जा रहें हैं। इसके बाद कांगड़ा में 25, कुल्लू और चंबा में 17-17, शिमला में 14, जबकि हमीरपुर, किन्नौर, सोलन और ऊना जिलों में 11-11 लोगों की जान गई है। बिलासपुर में 8, लाहौल-स्पीति में 6 और सिरमौर में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बादल फटने की घटनाएँ बनीं जानलेवा
अब तक राज्य में 43 बार फ्लैश फ्लड, 26 बार बादल फटने और 34 बार भूस्खलन की घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं में कुल 103 लोगों की जान गई है। इसके अलावा बारिश के दौरान हुए सड़क हादसों में भी 76 लोगों की मौत हो चुकी है।
सरकारी विभागों को भी भारी नुक्सान
प्रदेश में अब तक कुल नुक्सान का आंकड़ा 1,538 करोड़ रुपए के पार जा चूका है। इनमें सबसे ज़्यादा नुक्सान लोक निर्माण विभाग को हुई है, जिसे करीब 780 करोड़ रुपए का नुक्सान उठाना पड़ा है। जलशक्ति विभाग को भी लगभग 513 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुक्सान हुआ है।
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