भाषा से भाषा को जोड़कर समूची मानवता को एक करना मेरे जीवन का लक्ष्य : अनिल कुमार भारती
त्रि भाषा तुलनात्मक ज्ञान विकास पद्धति पर आधारित कार्यशाला का किया आयोजन
पटियाला : केंद्रीय विद्यालय नाभा छावनी में त्रि भाषा तुलनात्मक ज्ञान विकास पद्धति पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय लेखक एवम शिक्षाविद श्री अनिल कुमार भारती बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। प्रिंसिपल सुश्री सपना टेंभूरने ने पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत करते हुए कहा कि श्री अनिल कुमार भारती का केंद्रीय विद्यालय में आकर अध्यापकों और विद्यार्थियों को संबोधित करना एक यादगारी आयोजन बन गया है। श्री सुशील कुमार आज़ाद ने अनिल कुमार जी का जीवन परिचय देते हुए उनकी अनमोल रचनाओं की जानकारी दी। श्री अनिल कुमार भारती जी ने अपने भाषाई एकता के फार्मूले को स्पष्ट करते हुए उपस्थित अध्यापकों के समक्ष हिंदी के साथ साथ अन्य देसी विदेशी भाषाओं को आपस में जोड़ने वाली अपनी अनूठी खोज त्रिभाषा तुलनात्मक ज्ञान विकास पद्धति का विस्तार सहित वर्णन किया। उन्होंने अपनी ‘ फोर इन वन मैजिक ‘ तथा ‘ थ्री इन वन लिंग्विस्टिक मैजिक ‘ पुस्तकों के सृजन का ध्येय स्पष्ट करते हुए कहा कि “इस संसार में जिस प्रकार प्रकृति ने एक जैसा वाक् यंत्र समूची मानवता को दिया है उसी तरह से संसार की समस्त भाषाएं कहीं न कहीं एक ही सूत्र से जुड़ी हैं। उच्चारण स्थान और ध्वनियों की एकरूपता भाषाओं की एकता का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी, रूसी, जर्मन, लैटिन आदि सहित समस्त भाषाओं की वर्णमालाओं में जो एकरूपता है, वहीं मेरे सिद्धांत का आधार है। उन्होंने भाषाओं को आपस में जोड़ने वाले कई सूक्ष्म और दीर्घ सूत्र भी सांझा किए। एक भाषा के वर्णों का दूसरी भाषा से समान वर्णों के साथ व्यंजनों का समानार्थी व्यंजनों से मिलाप करते हुए आगे बढ़ना इस विशेष पद्धति का विशेष आकर्षण है। विश्व की सभी भाषाओं को आपस में जोड़ते हुए समूची मानवता को एकता के सूत्र में पिरोना तथा विश्व की सभी संस्कृतियों के महान सिद्धांतों और विरासत को आपस में सांझा करना एक बहुत ही पवित्र कार्य है जिसे संपन्न करने में उन्हें देश विदेश से बहुत समर्थन भी मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षा शास्त्री सुशील कुमार आज़ाद ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि अनिल कुमार भारती का अंग्रेजी लिपि में हिंदी लेखन की की गई खोज यूनिकोड के अनुसार बहुत ही सटीक रही है जबकि यूनिकोड बाद में प्रकाश में आया है। श्री भारती जी ने सभी अध्यापकों को अपनी लिखी भिन्न भिन्न पुस्तकें भेंट की। अंत में श्रीमती वंदना महाजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर श्रीमती आशिमा, रूपाली धीर, राजन सहगल, सुरेंद्र सिंह, बलवंत सिंह, तुषार मित्तल, प्रवेश कुमार, सुनीता , अमृत कौर, रितु शर्मा, सिमरन कौर, कुलविंद्र कौर, हरकीर्तन कौर, मनदीप कौर सोनी, सोनिका, नवदीप शर्मा आदि उपस्थित थे।
भाषा से भाषा को जोड़कर समूची मानवता को एक करना मेरे जीवन का लक्ष्य : अनिल कुमार भारती
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