नई दिल्ली, 17 मार्च: राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद के चालू बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामलों को रोकने के लिए एक सशक्त तंत्र विकसित करने की मांग की। उनका कहना था कि हाल के दिनों में एनआरआई की संपत्तियों पर कब्जे की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे इस समुदाय में भय और चिंता का माहौल बन गया है।
एनआरआई समुदाय के डर का माहौल
संधू ने संसद में बोलते हुए कहा, “एनआरआई की संपत्तियों पर कब्जे के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और इसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह उनकी मातृभूमि से जुड़ी एकमात्र धरोहर होती है।” सांसद संधू ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
एनआरआई संपत्तियों की सुरक्षा के लिए तंत्र बनाने की आवश्यकता
संधू ने यह भी कहा कि एनआरआई समुदाय को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि उनकी संपत्तियां सरकार द्वारा संरक्षित हैं। उनके अनुसार, एक मजबूत तंत्र बनाने की आवश्यकता है, जिससे संपत्तियों पर अवैध कब्जे की बढ़ती चुनौती से निपटा जा सके और इस समुदाय का विश्वास सरकार और भारतीय कानूनी प्रणाली पर फिर से बहाल हो सके।
संधू ने यह उल्लेख किया कि विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों में 18 राज्यों से एनआरआई द्वारा संपत्ति विवादों को लेकर 140 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से सबसे अधिक 22 शिकायतें तमिलनाडु से, 18 उत्तर प्रदेश से और 12 दिल्ली से आई हैं।
एनआरआई समुदाय के योगदान की सराहना
सांसद ने एनआरआई समुदाय के योगदान को भी सराहा और कहा, “एनआरआई केवल वित्तीय योगदान नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल भारी मात्रा में धन भेजते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने उदाहरण के तौर पर हाल ही में हुए यूके संसद चुनावों का हवाला दिया, जिसमें भारतीय मूल के 29 सांसद चुने गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय प्रवासी दुनिया भर में अपने प्रभाव को बढ़ा रहे हैं।
संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सांसद के सुझाव
इस मुद्दे को हल करने के लिए सांसद संधू ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, उन्होंने एनआरआई की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भूमि मानचित्रण प्रबंधन प्रणाली शुरू करने की बात कही, जिससे अवैध कब्जे को रोका जा सके। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से यह आग्रह किया कि अवैध कब्जे के मामलों में एक वन-स्टॉप समाधान प्रणाली बनाई जाए, जिससे तुरंत कार्रवाई की जा सके।
संधू ने एक साधारण नोटिस के माध्यम से अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने की समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरआई संपत्तियों से संबंधित कानूनी मामलों को फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से जल्दी निपटाया जाना चाहिए और भारतीय दूतावासों के माध्यम से एनआरआई को अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करने के लिए एक समर्पित सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।
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