जानिए फास्ट फूड खाने से आपके शरीर को कितना नुकसान होता है ?

by Nishi_kashyap
फास्ट फूड

Disadvantages of Eating Fast Food: डॉ. वरिंदर कुमार (सुनाम ऊधम सिंह वाला) के अनुसार, बच्चों और किशोरों और युवाओं में फ़ास्ट फ़ूड का सेवन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। बच्चे और किशोर माता पिता की मर्जी से या जिद से इसे अपने खान – पान में शामिल कर रहे हैं। बच्चों के साथ साथ युवा भी फ़ास्ट फूड का आदि होते जा रहें है। यह बहुत चिंता का विषय है, क्योंकि कुछ पल का जीभ का स्वाद आने वाले समय में आपको कई घातक परिणाम दे सकता है।

फ़ास्ट फ़ूड की बढ़ती लोकप्रियता के आखिर क्या कारण है ?

इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं:

पोषक तत्वों की कमी

फ़ास्ट फ़ूड में बहुत ज्यादा मात्रा में कैलोरी पाई जाती है क्योंकि इसमें फैट, शुगर, और नमक बहुत ज्यादा होता है, जबकि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, और मिनरल की मात्रा कम पाई जाती है।

आकर्षक

फास्टफूड देखने में आकर्षक होते है जिसके कारण बच्चे इनकी ओर खींचे चले जाते हैं इसके अलावा इनका स्वाद भी बच्चों और किशोरों को आकर्षित करने में सहायक होता है।

कम कीमत व् आसान उपलब्धता

फ़ास्ट फ़ूड की कीमते भी ज्यादा नहीं होती है और ये आसानी से हर गली, चौराहे पर मिल जाते हैं। सस्ते होने के कारण इन्हे हर युवा खरीदना पसंद करता है।

मीडिया का रोल

टीवी और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से बच्चे इनकी ओर आसानी से आकर्षित होने लगते हैं। विज्ञापन बच्चों के मन पर बहुत गहरा प्रभाव डालते हैं।

रीती रिवाज

मेहमानों के घरों में आने पर अब फ़ास्ट फ़ूड को चुना जाता है और शादियों और पार्टियों में भी फ़ास्ट फ़ूड के स्टॉल अलग से लगाए जाते हैं। जिस कारण फ़ास्ट फ़ूड की ओर बच्चों का रूझान बढ़ता है।

ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी

ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी जैसी सेवाओं ने फ़ास्ट फ़ूड की लोकप्रियता को बढ़ावा दिया है इसके जरिए युवा भोजन के स्थान पर इसे ज्यादा महत्व देते है।

फ़ास्ट फ़ूड और हार्मोनल प्रभाव

जब हमें फ़ास्ट फ़ूड खाने की ज्यादा इच्छा होने लगती है तो दिमाग में डोपामाइन नाम का हार्मोन रिलीज होता है। जिसके कारण पेट में घ्रेलिन नामक हार्मोन पैदा होता है, जो हमें ज़्यादा कैलोरी वाला जंक फ़ूड ढूँढने के लिए प्रेरित करता है।

जब हमें ज़्यादा कैलोरी वाला भोजन मिल जाता है, तो सेरोटोनिन नामक हार्मोन का लेवेल भी बढ़ जाता है। जिसे सेरोटोनिन हार्मोन कहा जाता है। इसे खुशी का हार्मोन भी माना जाता है, जो हमें फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करने के लिए प्रेरित करता है।

फ़ास्ट फ़ूड के सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव

मोटापा:

फास्टफूड का ज्यादा सेवन करने से संतुलित आहार की कमी होने लगती है जिसके कारण कुपोषण और मोटापा बढ़ने लगता है। लगभग 75% किशोर सप्ताह में कम से कम दो बार फ़ास्ट फ़ूड का सेवन जरूर करते हैं।

पोषण की कमी:

ज्यादा फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करने से जब बच्चे मोटे हो जाते हैं, तो बच्चे वजन कम करने की इच्छा रखने लगते हैं। इस बिच वे भोजन करना कम कर देते हैं जिसका सीधा प्रभाव शरीर पर पड़ने लगता है। इसके साथ ही शरीर में कमज़ोरी आना शुरू हो जाती है और बच्चे तनाव का शिकार भी होने लगते है।

मासिक धर्म की समस्याएँ:

किशोरावस्था में 78% लड़कियों को महसूस होने लगता है की उनका वजन ज़्यादा है। 70 % से ज्यादा वजन वाली लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान बहुत परेशानी आती है क्योंकि ज्यादा वजन के कारण बी.एम.आई. प्रभावित होता है, जो लड़कियों के मासिक धर्म के चक्र को भी प्रभावित करता है।

शुगर:

फ़ास्ट फ़ूड बच्चों के शरीर को बहुत प्रभावित कर रहा है इसके लगातार सेवन से बच्चे मोटापे के शिकार होते जा रहें है। जिस कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस आ रही है और इसके परिणामस्वरूप कम उम्र के बच्चों में शुगर की बीमारी शुरू होने लगी है।

हार्मोनल का असंतुलित रहना:

फ़ास्ट फ़ूड में इस्तेमाल होने वाले केमिकल बच्चों के विकास के हार्मोन पर बुरा प्रभाव डालते हैं और उनमें मूड स्विंग भी पैदा करते हैं।

किशोरों के लिए एक संतुलित आहार में शामिल होनी चाहिए ये चीजें:

45-65% कार्बोहाइड्रेट:

यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। जो बच्चे के विकास और रोज़ाना की गतिविधियों और दिमाग के लिए बहुत ज़रूरी हैं।

10-30% प्रोटीन:

प्रोटीन भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। यह विकास, कोशिकाओं और ऊतकों को बनाने और मांसपेशियों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। अच्छे स्रोतों में पोल्ट्री, मछली, अंडे, बीन्स, मटर, सोया, नट्स और बीज शामिल हैं।

दाल, सब्ज़ी, दूध, लस्सी, शिकंजी और पारंपरिक खाने की खपत कम होती जा रही है। टीन एज में बच्चे अपनी रोज़ाना की कैलोरी का 25 से 45 प्रतिशत फ़ास्ट फ़ूड से ले रहे हैं, जो कि गलत है।

निष्कर्ष

कभी-कभार फ़ास्ट फ़ूड खाने से शरीर को ज़्यादा नुकसान नहीं होता है। लेकिन यदि हम इसे अपनी रोज़ाना के खान-पान में शामिल कर रहें हैं तो यह घातक बीमारियों को जन्म दे सकता है। इसलिए माता-पिता के लिए यह जरूरी है की वे किशोर अवस्था के बच्चों में फ़ास्ट फ़ूड और कोल्ड ड्रिंक के रुझान को कम करके एक संतुलित और पौष्टिक आहार देने पर ज्यादा ध्यान दें। ताकि भविष्य में फ़ास्ट फ़ूड के कारण आने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

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