चंडीगढ़, 06 दिसंबर 2025: डीपफेक और एआई जेनरेटेड कंटेंट के दुरुपयोग को रोकने के लिए लोकसभा में नया बिल पेश हुआ है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने शुक्रवार को ‘रेगुलेशन ऑफ डीपफेक बिल’ टेबल किया। यह बिल लोगों के चेहरे का बिना इजाजत इस्तेमाल रोकने पर केंद्रित है।
बिल के मुताबिक इंटरनेट पर कोई भी एआई कंटेंट डालने से पहले उसमें दिखाए गए व्यक्ति से सहमति लेना जरूरी होगा। दुरुपयोग करने वालों के लिए सजा का प्रावधान भी है। श्रीकांत शिंदे ने कहा कि उत्पीड़न, धोखाधड़ी और गलत सूचना फैलाने के लिए डीपफेक का इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे तुरंत नियामक सुरक्षा की जरूरत पैदा हुई है।
शिंदे ने बिल पेश करते हुए बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप लर्निंग के आगे बढ़ने से डीपफेक मीडिया हेरफेर का बड़ा हथियार बन गया है। शिक्षा, मनोरंजन और रचनात्मक क्षेत्रों में इसका फायदा तो है लेकिन गलत इस्तेमाल से व्यक्तिगत गोपनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता का विश्वास खतरे में पड़ जाता है।
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