चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह का हुआ आगाज

पहले दिन शांतनु भटाचार्य ने दी विभिन्न रागों की प्रस्तुति

by TheUnmuteHindi
चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह का हुआ आगाज

चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह का हुआ आगाज
पहले दिन शांतनु भटाचार्य ने दी विभिन्न रागों की प्रस्तुति
पटियाला : उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह का आगाज बुधवार शाम 6 बजे हुआ । उद्घाटन समारोह के दौरान उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने कहा कि शास्त्रीय संगीत की विरासत ,विशेषकर पटियाला घराने को पुनर्जीवित करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए केंद्र का यह एक विनम्र प्रयास है जो पटियाला कलाप्रेमी जनता के सहयोग से ही सफल हो पाएगा। मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ सुरिंदर कपिला ने किया विधिवत उद्घाटन ।

-शांतनु भटाचार्य ने ख्याल व ठुमरी की प्रस्तुति दी
चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह के पहले दिन शांतनु भटाचार्य ने ख्याल व ठुमरी की पेशकश दी गई। पटियाला में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक संगीत महोत्सव के आज के कलाकारों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के जाने-माने नाम, शांतनु भट्टाचार्य ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
खयाल और ठुमरी में अपनी अद्भुत प्रतिभा के लिए पहचाने जाने वाले शंतनु ने 20 वर्ष की उम्र में आकाशवाणी संगीत प्रतियोगिता जीती और 43 वर्ष की उम्र में प्रसार भारती का ‘टॉप ग्रेड’ खिताब हासिल किया। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें उनकी मां इरा भट्टाचार्य से मिली। इसके बाद उन्होंने सुखेंदु गोस्वामी से आगे का प्रशिक्षण लिया और पटियाला घराने के प्रख्यात गुरु प्रसून बनर्जी और मीरा बनर्जी से तालीम प्राप्त की।

शांतनु ने हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन, आकाशवाणी राष्ट्रीय कार्यक्रम और आकाशवाणी संगीत सम्मेलन जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने लॉस एंजेलिस, न्यूयॉर्क, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, फिनलैंड, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भी कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं।
संगीत में उनके प्रमुख योगदानों में स्कूलों में संगीत कार्यशालाएं आयोजित करना, विभिन्न रागों में रचनाएं करना, भक्ति गीतों की रचना करना आदि शामिल हैं।

आज के अन्य प्रमुख कलाकारों में से एक थे तन्मय देवचाके।
भारतीय शास्त्रीय और समकालीन शैली में विशेष योग्यता रखने वाले यह मशहूर हारमोनियम वादक अहमदनगर (महाराष्ट्र) के संगीत परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मात्र चार साल की उम्र में ही उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की शुरुआत कर दी थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके दादा गोपालराव देवचाके से हुई, जिसमें हारमोनियम और सिंथेसाइजर शामिल थे। इसके बाद पंडित प्रमोद मराठे से गहन प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में वे पंडित उल्हास कशालकर और पंडित सुरेश तळवलकर जैसे महान गुरुओं की देखरेख में संगीत साधना कर रहे हैं। तन्मय की कला उनकी पारंपरिक और समकालीन शैली के अनूठे समायोजन के लिए जानी जाती है, जो हारमोनियम पर उनकी अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है।

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