नई दिल्ली , 29 जनवरी 2025: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य कोटे के तहत स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अधिवास-आधारित आरक्षण (Domicile-Based Reservation) को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले ने महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि अब राज्य स्तर पर अधिवास के आधार (Domicile-Based Reservation) पर स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल योग्यता, यानी राष्ट्रीय पात्रता/प्रवेश परीक्षा (NEET) के अंकों के आधार पर होगा।
कोर्ट ने कहा :
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी शामिल थे, ने कहा कि भारतीय नागरिकों और निवासियों को यह अधिकार है कि वे कहीं भी निवास चुन सकें और संविधान उन्हें भारत भर के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश का अधिकार भी प्रदान करता है। अदालत ने कहा, “हम सभी भारत के क्षेत्र के निवासी हैं। प्रांतीय या राज्य अधिवास जैसा कोई विभाजन नहीं होना चाहिए, केवल एक अधिवास होता है। संविधान हमें भारत में कहीं भी निवास चुनने और देश के किसी भी भाग में व्यापार या पेशा करने का अधिकार देता है।”
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राज्य विशेष में रहने वालों के लिए आरक्षण की बात केवल स्नातक पाठ्यक्रमों तक सीमित हो सकती है, लेकिन उच्च स्तर पर, जैसे पीजी पाठ्यक्रमों में, निवास के आधार पर आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इसका प्रभाव उन छात्रों पर नहीं पड़ेगा जिन्होंने पहले से निवास-आधारित आरक्षण के आधार पर अपनी डिग्री पूरी की है, और पहले से दिए गए चयन मानदंडों से प्रभावित छात्र इसके अंतर्गत नहीं आएंगे।
यह मामला 2019 का है, जब न्यायालय की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील सुनी थी। उच्च न्यायालय ने पहले ही इस मामले में फैसला दिया था कि पीजी चिकित्सा पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे के तहत निवास-आधारित आरक्षण असंवैधानिक है। इसके बाद, न्यायालय ने मामले को तीन-न्यायाधीशों की पीठ को भेजने का फैसला लिया था, ताकि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गहन विचार किया जा सके।
महत्वपूर्ण जानकारी:
- न्यायालय का निर्णय: पीजी चिकित्सा पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे के अधिवास-आधारित आरक्षण को असंवैधानिक माना गया।
- आधिकारिक आधार: निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत दिया गया, जो समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है।
- प्रभाव: यह निर्णय वर्तमान में निवास-आधारित आरक्षण से प्रभावित छात्रों को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन भविष्य में ऐसे आरक्षण को समाप्त कर दिया गया है।
- संबंधित मामला: 2019 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने निवास-आधारित आरक्षण को असंवैधानिक घोषित किया था, जिसका विरोध किया गया था।
इस निर्णय से स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव आएगा, जहां अब छात्रों को योग्यता के आधार पर प्रवेश मिलेगा, न कि राज्य अधिवास के आधार पर।
ये भी देखे: ICC CEO Step Down : ज्योफ एलार्डिस ने अपने पद से इस्तीफा दिया ,बताई जा रही है कई वजहे !